दिल्ली:केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट साझा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र भेजने की जानकारी दी। यह इस्तीफा नीट (NEET-UG) पेपर लीक विवाद और दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय से चल रहे बड़े छात्र आंदोलन के दबाव के बाद आया है।
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी और धांधली के बाद देश भर के छात्र और विपक्षी दल लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे।कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर 36 दिनों से कड़ा विरोध प्रदर्शन चल रहा था।इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त किया था और शिक्षा मंत्रालय के दो सचिवों को भी बदला था।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने आधिकारिक पत्र में लिखा कि वे देश के युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर और देश में बनी वर्तमान स्थिति का कोई राष्ट्र-विरोधी ताकत लाभ न उठा सके और देश के बच्चों का समय कानूनी पेचीदगियों में न उलझे, इसलिए उन्होंने स्वेच्छा से पद छोड़ने का निर्णय लिया है।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के साथ ही सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच सहमति बन गई है। केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों की मुख्य माँगें स्वीकार कर ली हैं, जिनमें प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर (FIR) वापस लेना और प्रभावित छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की गारंटी शामिल है। इस फैसले के बाद आंदोलनकारियों ने अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की है।




