झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन की बड़ी बहु और भाजपा नेत्री सीता सोरेन के एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट किया गया था ”परिवारवादी शहजादे और बाप-बेटे की जोड़ी ने झारखंड को लूट का अड्डा बनाकर छोड़ दिया है। लेकिन अब जनता ने ठान लिया है कि इस बार ठगबंधन का पूरी तरह से सफाया होगा ।14 के 14 सीटों पर झारखंड की जनता कमल खिलाएगी।” इस पोस्ट के बाद बवाल होने पर पोस्ट डिलीट कर दिया गया साथ ही सिट्टा सोरेन ने सफाई देते हुए कहा कि”अभी अभी पता चला है कि मेरे सोशल मीडिया अकाउंट से एक ट्वीट पोस्ट किया गया है जो असंवेदनशील है और मैं इसके लिए क्षमा प्रार्थी हूं।चुनावी व्यस्तताओं के कारण मैं अपना सोशल मीडिया खुद नहीं चला पा रही हूं, और इसकी जिम्मेदारी एक सोशल मीडिया टीम को दी थी जिसकी तरफ से चूक हुई है। मामले का संज्ञान लेकर उचित कार्यवाही कर दी गईं है। साथ ही मैं ये कहना चाहती हूं कि जिसने भी मेरी राजनीति को देखा है वे जानते हैं कि मैं बाबा का कितना सम्मान करती हूं पर कुछ लोग इतने मुद्दाविहीन हैं कि इस ट्वीट का राजनैतिक फायदा उठाना चाहते हैं। झारखंड की जनता से आग्रह है कि इनकी भ्रामक बातों में न फंसे।”
हालाँकि सीता सोरेन की इस सफाई पर झामुमो ने कहा ”हम जानते है कि अपनी वफ़ादारी साबित करने की होड़ में आपने जो घटिया बात लिखी इस चाहत में कि पार्टी खुश होगा, मोदी खुश होगा वो दाव आपका उल्टा पड़ गया क्योंकि बीजेपी को भी पता है गुरु जी का अपमान झारखण्ड कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। अब लीपा-पोती करने से आपके अंदर की सोच छुपेगी नहीं! आपके मन की बात झारखण्ड जान चुका है अब सफ़ाई देने की ज़रूरत नहीं!”
ट्वीट पे बवाल के बाद सीता सोरेन गाने लगी सीता सोरेन के गुनगान
झारखंड आंदोलन के एक मजबूत सिपाही, राजनीति के भीष्म पितामह, हमारे दुखहर्ता और पालनकर्ता आदरणीय बाबा जी का जेएमएम द्वारा जो अपमान किया जा रहा है, उससे झारखंड का कोई भी गांव अछूता नहीं है। जेएमएम के मुखौटे में बैठे सत्ता की लालसा लिए शीर्ष नेताओं द्वारा हम सबके प्रेरणास्रोत बाबा जी की तबियत खराब होने के बावजूद भी अपने स्वार्थवश उन्हें उलगुलान के नाम पर कभी चिलचिलाती धूप में बैठाया गया तो कभी संसद ले जाया गया। यही नहीं परमपूज्य दिशोम गुरु जी को निर्णय लेने वाली समिति से भी दरकिनार कर दिया गया।
जिन्होंने अपने खून पसीने से जेएमएम पार्टी रूपी वृक्ष को सींचा, खड़ा किया आज उसी पार्टी के द्वारा बाबा जी के संघर्षों को भुला दिया गया है, उनकी बनाई गई बगिया को उजाड़ कर पहले फेंका गया फिर बंजर बनाकर छोड़ दिया गया, ऐसे संस्कारहीन, नैतिकता की सारी हदें पार करने वाले जेएमएम के नेता आज खुद को बगिया का मालिक समझने की भूल कर बैठे हैं।
दुर्गा सोरेन जी के देहावसान के बाद जब मुझे और मेरी बेटियों को मेरे ही परिवार द्वारा दरकिनार कर दिया गया तब मुझ जैसे अबोध का बाबा जी ही एकमात्र सहारा बने रहे, उनके संरक्षण में मैंने राजनीति का क, ख, ग…सीखा है, मेरी बेटियों ने अपने बाबा जी उंगली पकड़कर चलना सीखा, अपने पैरों पर खड़ा होना सीखा। पूज्यनीय ससुर होने के साथ साथ बाबा जी मेरे लिए राजनीति के द्रोणाचार्य हैं, जिनका अपमान करना मेरे लिए खुद के अस्तित्व पर सवाल खड़ा करना है, लेकिन जेएमएम के पास जब कोई भी मुद्दा नहीं बचा है तो वह आज ऐसी गन्दी और तुच्छ राजनीति को जनता के सामने परोसने की कोशिश कर रहे हैं।
झारखंड के लोगों के दिलों में जितना प्रेम बाबा जी के लिए है, उतना ही या उससे कहीं ज्यादा मेरे दिल में भी है, मेरी बेटियां इस बात की गवाह हैं कि बाबा जी सिर्फ मेरे ससुर भर नहीं, बल्कि मेरे गुरु, मेरे पिता तथा मेरी छोटी राजनीतिक पारी के मार्गदर्शक और सूत्रधार भी हैं। उनके कदमों की धूल को अपने माथे में लगाकर ही मैंने दुमका की सेवा करने का संकल्प लिया है और इन रास्तों में विरोधियों के बिछाये कांटे तो जरूर आयेंगे पर आपको बताना चाहती हूं कि कांटों पर चलना बाबा जी का इतिहास रहा है और इस परंपरा को आगे बढ़ाकर अपने पैर के छालों को भुलाकर उन्हीं के रास्तों में चलकर दुमका की सेवा करना मेरा प्रथम कर्तव्य है।




