भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के शताब्दी समारोह में शामिल हुईं राष्ट्रपति मुर्मू

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hemant soren

रांची : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद- राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान नामकुम, रांची के गौरवशाली एक सौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुईं। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने संस्थान के परिसर में “एक पेड़ मां के नाम” कार्यक्रम के अंतर्गत वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नामकुम की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण हुए। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू , राज्यपाल संतोष गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन , केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मंत्री संजय सेठ एवं अन्य अतिथिय शामिल हुए। राष्ट्रपति के द्वारा वृक्षारोपण किया गया। इस यात्रा में यह संस्थान 10 लाख परिवारों के आजीविका का माध्यम बना है। ₹400 करोड़ से अधिक के लाह का निर्यात हुआ है। देश की कुल लाह उत्पादन में अकेले इस संस्थान की भूमिका 55% से अधिक की है।

राष्ट्रपति मुर्मू: मेरा झारखंड से विशेष लगाव है। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पवित्र धरती झारखंड आना मेरे लिए तीर्थ यात्रा के समान है। यहां के लोगों से मुझे बहुत स्नेह मिलता है। राज्यपाल के तौर पर मैंने कई वर्ष यहां जनसेवा का कार्य किया है।हमारे देश के कई राज्यों में Lac Farming की जाती है। भारत के कुल उत्पादन का 50 प्रतिशत से अधिक लाख उत्पादन झारखंड में होता है। भारत में लाख का उत्पादन मुख्य रूप से जनजातीय समाज द्वारा किया जाता है। यह जनजातीय समाज की आय का एक महत्वपूर्ण साधन है।आज का दौर disruptive technologies का है। हमें इन तकनीकों का लाभ उठाना है। साथ ही इनके दुष्प्रभावों से भी बचना है।हम सब जानते हैं कि हमारे देश में बहुत बड़ी जनसंख्या की आजीविका कृषि आधारित है। सरकार द्वारा कृषि सुधार के लिए कई कदम उठाए गए हैं। गांवों में कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार किया जा रहा है।कृषि को लाभदायक उद्यम बनाने के साथ-साथ, 21वीं सदी में कृषि के समक्ष तीन अन्य बड़ी चुनौतियां हैं – खाद्य और पोषण सुरक्षा को बनाए रखना, संसाधनों का Sustainable use, तथा जलवायु परिवर्तन। Secondary Agriculture से जुड़ी गतिविधियां इन चुनौतियों का सामना करने में मदद कर सकती हैं।Secondary Agriculture गतिविधियों के माध्यम से अपशिष्ट पदार्थों यानि waste-material का भी सही प्रयोग किया जा सकता है। उनको प्रसंस्कृत करके उपयोगी तथा मूल्यवान वस्तुएं बनाई जा सकती हैं। इससे पर्यावरण का संरक्षण होगा। साथ ही किसानों की आय भी बढ़ेगी। Secondary Agriculture, Waste to wealth का एक अच्छा उदाहरण है।

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