झारखण्ड : हेमंत सोरेन का सस्पेंस खत्म! लोकसभा चुनाव लड़ने पर आ गया ताजा अपडेट अधिक उम्र होने के कारण वे क्षेत्र में सक्रिय भी नहीं हैं।शिबू वर्तमान में राज्यसभा सदस्य भी हैं। उनकी जगह सोरेन परिवार के किसी सदस्य के चुनाव लड़ने की चर्चा है।अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि खुद हेमंत सोरेन भी जेल से ही दुमका से चुनाव लड़ सकते हैं।वर्ष 2019 के पिछले चुनाव में शिबू सोरेन को भाजपा प्रत्याशी सुनील सोरेन ने हराया था। इससे पहले वे आठ बार दुमका संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके थे।वर्ष 1980 में पहली बार जीतने के बाद शिबू सोरेन वर्ष 1989, 1991, 1996, 2002, 2004, 2009 और 2014 के आम चुनावों में यहां अपना परचम लहराते रहे।दुमका सीट पर उनकी सिर्फ़ तीन बार हार हुई। पहली बार 1984 में कांग्रेस के पृथ्वी चंद किस्कू ने उन्हें शिकस्त दी। इसके बाद वर्ष 1998 और 1999 के चुनावों में उन्हें भाजपा प्रत्याशी के रूप में बाबूलाल मरांडी ने हराया था।शिबू सोरेन के अलावा, बाबूलाल मरांडी, सुदर्शन भगत और हेमलाल मुर्मू जैसे दिग्गजों के भी चुनाव लड़ने पर संशय है। वर्ष 2009 से अबतक लगातार तीन बार लोहरदगा संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव जीतनेवाले सुदर्शन भगत इस बार टिकट नहीं मिलने से चुनाव नहीं लड़ेंगे। पार्टी ने उनकी जगह राज्यसभा सदस्य समीर उरांव को टिकट दिया है।यही बाबूलाल वर्ष 2019 के चुनाव में गठबंधन के तहत उनके पक्ष में प्रचार कर रहे थे। उस समय वे झारखंड विकास मोर्चा के अध्यक्ष थे। बाबूलाल ने पिछला लाेकसभा चुनाव कोडरमा से झारखंड विकास मोर्चा के टिकट पर लड़ा था,झारखंड के एक और नेता हेमलाल मुर्मू हैं, जिनके भी चुनाव लड़ने पर संशय है। झामुमो के इस धाकड़ नेता ने राजमहल संसदीय सीट से वर्ष 2004 में जीत हासिल की थी। हालांकि वर्ष 2014 में ये झामुमो छोड़कर भाजपा चले गए थे, जिसके टिकट पर वर्ष 2014 तथा 2019 में राजमहल से चुनाव लड़ा, लेकिन निराशा हाथ लगी। लगभग नौ वर्ष बाद इनकी झामुमो में वापसी हो गई है।राजमहल से ही लगातार दो बार चुनाव जीत चुके झामुमो के विजय हांसदा को ही वहां से इस बार भी टिकट मिलने की उम्मीद है। ऐसे में हेमलाल के चुनाव लड़ने पर संशय है।



