24 साल के इतिहास में झारखंड पहली बार लिखने जा रहा नया अध्याय, झारखंड अब बड़े कर्ज वाले राज्यों की सूची से बाहर, इस साल राज्य ने नहीं लिए कोइ कर्ज

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Ranchi : 24 साल के इतिहास में झारखंड पहली बार नया अध्याय लिखने जा रहा है। युवा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कुशल नेतृत्व में यह पहला वित्तीय वर्ष है जब झारखंड ने कोई कर्ज नहीं लिया है और सैकड़ों करोड़ रुपये की पिछली क़र्ज़ अदायगी की है।अलग राज्य बनने के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि सरकार ने वित्तीय वर्ष में कोई कर्ज नहीं लिया। इतना ही नहीं इस वित्तीय वर्ष में झारखंड को बड़े कर्जे वाले राज्यों के वर्ग से बाहर निकलने में सफलता मिली है। जीएसडीपी के हिसाब से जिन राज्यों पर 30 प्रतिशत से अधिक कर्ज हो उन्हें बड़े कर्जे वाला राज्य कहा जाता है.कर्ज से मुक्ति पाने के लिए वित्त विभाग ने कई सुधारात्मक कदम उठाकर लागू किया. खुले बाजार से सस्ती दरों पर कर्ज लेकर महंगी कर्ज को खत्म करने में सरकार को सफलता मिली। इस प्रकार से कर्ज की पूरी अवधि का आकलन किया जाए तो सैकड़ों करोड़ रुपये बचाए भी गए। 4 साल पहले जब खाली खजाने के साथ लगभग सवा तीन करोड़ झारखंडवासियों की उम्मीद के रूप में हेमंत सोरेन जी ने इस राज्य की बागडोर संभाली थी। उन उम्मीदों को पूरा करते हुए आज वित्तीय हालात बेहद मजबूत हैं, जिसका परिणाम है कि हमने इस साल कोई कर्ज नहीं लिया।यह साढ़े तीन करोड़ झारखंडवासियों के विश्वास और भरोसे का ही परिणाम है कि झारखंड अब बड़े कर्ज वाले राज्यों की सूची से भी बाहर निकल आया है।आरबीआई ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि झारखंड सरकार ने आमदनी और खर्च का प्रबंधन ठीक कर महंगे कर्ज को खत्म किया है। साथ ही, आमदनी के नए स्रोत तलाश कर कर्ज के बोझ को भी कम किया है।

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