रांची हिंसा कांड संख्या 22/2022 में रांची पुलिस ने कोर्ट के समक्ष अंतिम प्रपत्र दाखिल कर दिया है. जिसमे पुलिस ने साक्ष्य की कमी बतायी है. इस मामले के अनुसंधानकर्ता (IO) द्वारा प्राथमिकी को सत्य बताया गया है. लेकिन उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर भविष्य में कोई सुराग मिलेगा तो इस मामले की जांच दोबारा शुरू की जाएगी क्योंकि फिलहाल आरोपियों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला है.इस पूरी बात की जानकारी मामले के सूचक (केस करने वाले) को भी दे दी गयी है.पुलिस से कोर्ट द्वारा यह पूछे जाने पर कि जब घटना सच थी तो पुलिस को कोई सुराग कैसे नहीं मिला, पुलिस ने टिप्पणी करने में असमर्थता जताते हुए कहा कि केवल आईओ ही बता सकता है कि क्या हुआ। आईओ अपनी टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हो सके।
मालूम हो की डेली मार्केट पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी मधुसूदन मोदक ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, ’10 जून की हिंसा के बाद उनके पुलिस स्टेशन में कई एफआईआर दर्ज की गई थीं। इनमें से एक एफआईआर में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है. दो महत्वपूर्ण एफआईआर 16/2022 और 17/2022 की जांच अभी भी जारी है. 16/22 की जांच पुलिस कर रही है जबकि 17/22 की जांच सीआईडी कर रही है.’गौरतलब है कि पिछले साल 10 जून को झारखंड की राजधानी में विरोध मार्च के दौरान हिंसा हुई थी. हिंसक प्रदर्शन को काबू करने के लिए पुलिस को फायरिंग और लाठीचार्ज करना पड़ा. पुलिस कार्रवाई में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी जबकि कई घायल हो गए थे। जिला प्रशासन को राजधानी में इंटरनेट सेवा बंद करनी पड़ी. तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र कुमार झा का भी तबादला कर दिया गया. घटना के बाद मामले की एनआईए जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका अभी भी झारखंड उच्च न्यायालय में लंबित है।पैगम्बर मोहम्मद पर अपमानजनक टिप्पणी के लिए बीजेपी नेता नुपुर शर्मा को निलंबित कर दिया गया है.



