सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक का मंगलवार को 80 साल की उम्र में निधन हो गया।उन्होंने दिल्ली के एम्स अस्पताल में आखिरी सांस ली. झारखण्ड सीएम हेमंत सोरेन ने शोक जताते हुए ट्वीट किया ”सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक श्री बिंदेश्वर पाठक जी के निधन की दुःखद सूचना मिली। सार्वजनिक शौचालय को सुलभ बनाकर स्वच्छता को आमजन तक पहुंचाने जैसे सामाजिक परिवर्तन के वाहक थे बिंदेश्वर जी।परमात्मा दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान कर शोकाकुल परिवारजनों को दुःख की यह विकट घड़ी सहन करने की शक्ति दे।”
पीएम मोदी ने शोक जताया ”डॉ. बिंदेश्वर पाठक जी का निधन हमारे देश के लिए एक गहरी क्षति है। वह एक दूरदर्शी व्यक्ति थे जिन्होंने सामाजिक प्रगति और वंचितों को सशक्त बनाने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया।बिंदेश्वर जी ने स्वच्छ भारत के निर्माण को अपना मिशन बना लिया। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन को जबरदस्त समर्थन प्रदान किया। हमारी विभिन्न बातचीत के दौरान स्वच्छता के प्रति उनका जुनून हमेशा दिखता रहा।उनका काम कई लोगों को प्रेरणा देता रहेगा।’ इस कठिन समय में उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएँ। शांति।”
मालूम हो की वैशाली जिले के रामपुर बाघेल गांव में जन्मे पाठक ने 1964 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में स्नातक की उपाधि प्राप्त की।उन्होंने 1980 में अपनी मास्टर डिग्री और 1985 में पटना विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।उन्होंने देश की स्वच्छता समस्याओं को हल करने के उद्देश्य से 1970 में सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस की स्थापना की।सुलभ ने अपनी साइट पर लिखा है कि 1991 में, पाठक को हाथ से मैला ढोने वालों की मुक्ति और पुनर्वास के लिए उनके काम के लिए और साथ ही पोर-फ्लश टॉयलेट तकनीक प्रदान करके पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

