रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने लगभग 150 झारखंड विधानसभा कर्मचारियों की ‘अवैध नियुक्ति’ से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए आज झारखंड विधानसभा सचिवालय को तत्कालीन झारखंड के राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू (अब भारत के राष्ट्रपति) को सौंपी गई न्यायमूर्ति विक्रमादित्य प्रसाद समिति की रिपोर्ट-2018 पेश करने का निर्देश दिया। यह तीसरी बार है जब हाई कोर्ट ने सचिवालय को निर्देश दिया है. मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्र एवं न्यायाधीश आनंद सेन की खंडपीठ ने आदेश सुनाते हुए स्पष्ट किया कि अगर इस बार उक्त रिपोर्ट नहीं सौंपी गयी, तो विधानसभा सचिव को अदालत में सशरीर उपस्थित रहना होगा.कोर्ट ने मामले की सुनवाई 16 अगस्त तक के लिए टाल दी.गौरतलब है कि शिव शंकर शर्मा ने पिछले साल जनहित याचिका दायर कर अदालत को 2005 से 2007 के बीच हुई नियुक्ति में हुई अवैधताओं के बारे में बताया था।शर्मा के वकील राजीव कुमार ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि मामले की जांच के लिए न्यायमूर्ति विक्रमादित्य प्रसाद आयोग का गठन किया गया था। आयोग ने वर्ष 2018 में राज्यपाल को रिपोर्ट सौंपी थी.तत्कालीन राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने विधानसभा अध्यक्ष को कार्रवाई का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.



