ससुराल वालों की प्रताड़ना और पति की बेरुखी को देखते हुए वह मायके आ गई और दो महीने यहीं रही. महिला का कहना है कि उसका पूरा जीवन पड़ा है, लिहाजा भरण-पोषण का खर्चा दिया जाए.
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राधिकरण ने पति का मेडिकल कराने की सलाह दी. पति ने प्राधिकरण के सामने मेडिकल रिपोर्ट रखी, जिसमें वह फिट पाया गया. मेडिकल रिपोर्ट को देखने के बाद पाया कि महिला ने पति पर झूठा आरोप लगाया था. महिला और उसके परिजन की काउंसलिंग की गई. उसके बाद महिला अपने पति के साथ ससुराल जाने को तैयार हो गई.
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव संदीप शर्मा ने बताया कि महिला ने पति पर झूठे आरोप लगाए थे कि वह दांम्पत्य संबंध निभाने योग्य नहीं है. काउंसलिंग के दौरान खुलासा हुआ कि पति को कोरोना फोबिया था, जिसकी वजह से वह पत्नी से भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहा था.
काउंसलिंग के दौरान पति ने खुलासा किया कि शादी के बाद से ही पत्नी के परिवार वाले कोरोना पॉजिटिव हो गए. ऐसे में उसको लगता था कि हार्ड इम्युनिटी की वजह से उसे या पत्नी में कोरोना के लक्षण नहीं दिखाई दिए. उसका मानना था कि जब आसपास वाले पॉजिटिव थे, तो हो सकता है कि उसे और पत्नी को भी कोरोना हो. इसकी वजह से वह संबंधों को निभाने से झिझकता था.




