SPORTS : पहली बार देश में बनी नीविया के बास्केटबाल को FIBA ने दी मंजूरी

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FIBAनई दिल्ली : फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल बास्केटबाल एसोसिएशन (FIBA) ने पहली बार नीविया द्वारा निर्मित बास्केटबाल को भारत में अप्रूवल दी है. इससे पहले फीबा ने किसी भी भारतीय बास्केटबाल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अप्रूवल नहीं दी थी. इन्ही कारणों से बास्केटबाल के बाजार में चीन व मलेशिया की कंपनियों का कब्जा था. इन्ही देशों से ही पूरी दुनिया में बास्केटबाल सप्लाई किए जाते थे, लेकिन अब भारत को भी इस लिस्ट में शामिल कर लिया गया है.

फ्रीविल स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के एमडी और अध्यक्ष राजेश खरबंदा ने कहा, भारतीय बास्केटबॉल को मंजूरी देना FIBA की ओर से एक बहुत बड़ा कदम है. हमें इस का गर्व है कि हम सस्ते में अच्छी गुणवत्ता और तकनीक प्रदान करने में सक्षम हैं. अब प्रतियोगिताओं के लिए प्रशिक्षित करने के लिए पूरे देश के स्कूलों, विश्वविद्यालयों और बास्केटबाल प्रेमियों के लिए सामान आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे.
आपको बता दें कि बास्केटबाल की इजाद 1981 में फिजिकल एजूकेशन के इंस्ट्रक्टर जेम्स नेस्मिथ ने किया था. उसके बाद से तमाम देशों में इसे खेला जाने लगा. पहले चमड़े की सिलाई वाली बास्केटबाल का निर्माण किया जाता था. भारत में 1980 में पहली बार नीविया कंपनी ने ही बास्केटबाल का निर्माण किया था. उस समय चमड़े से इसका निर्माण किया जाता था. 1934 में नीविया कंपनी बनाई गई थी और 1960 में इसका ब्रांड नेम भी नीविया रखा गया.

 

1991 में नीविया ने देश में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर का बास्केटबाल का निर्माण करने के लिए प्लांट लगाया था. उसके बाद हैंड मोल्डेड बास्केटबाल के दिन खत्म हुए और मशीन से इसका निर्माण किया जाने लगा. करीब 30 सालों की मेहनत व रिसर्च के बाद जालंधर ने यह मुकाम हासिल कर ही लिया कि चीन व मलेशिया को चुनौती दे सके.