रांची: झारखंड में सरकारी भर्तियों में कथित गड़बड़ियों और सीबीआई जांच की मांग को लेकर छात्रों और युवाओं के आंदोलन के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आज प्रेस कांफ्रेंस में पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि गठबंधन सरकार सात वर्षों से सत्ता में है, लेकिन अब तक एक भी बड़ी भर्ती प्रक्रिया को सही तरीके से पूरा नहीं करा पाई है।चंपई सोरेन ने कहा कि हाल में हुआ छात्र और युवा आंदोलन झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद का सबसे बड़ा आंदोलन था। उनके मुताबिक, छात्रों ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखीं और JPSC तथा JSSC की भर्तियों में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की मांग की।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस मुद्दे पर जवाब देने में काफी समय लगाया। चंपई सोरेन ने कहा कि आए दिन ऐसी खबरें सामने आती रहीं कि सरकारी नौकरियां कथित तौर पर लाखों रुपये में बेचे जाने की चर्चा है। उन्होंने इसे झारखंड के लिए बेहद दुखद स्थिति बताया।
बाबूलाल मरांडी ने भी सरकार को घेरा
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लोकतंत्र में सभी को विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीजेपी के वॉलंटियर्स जबरन स्कूलों में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे, जबकि झारखंड के छात्र पूर्व सूचना देकर शांतिपूर्ण तरीके से हेमंत सोरेन का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज करा रहे थे।मरांडी ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित हमले की निंदा करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करने वालों के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।
संजय सेठ ने उठाए प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल
रांची स्थित भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सांसद संजय सेठ ने रांची, हजारीबाग, गिरिडीह समेत विभिन्न जिलों में आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ कथित मारपीट की घटनाओं को निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण बताया।उन्होंने सवाल उठाया कि आंदोलनकारी छात्रों से सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ता क्यों भिड़े और क्या अलग-अलग जिलों में हुई समान घटनाएं महज संयोग हैं। सेठ ने इन घटनाओं में झामुमो कार्यकर्ताओं की कथित भूमिका और प्रशासन की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए।भाजपा नेता ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन अपराध नहीं है। असहमति का जवाब दमन के बजाय संवाद और समाधान से दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को लाठी के बल पर दबाया नहीं जा सकता।




