झारखण्ड: PLFS की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, झारखण्ड अब देश का तीसरा सबसे कम बेरोजगारी वाला राज्य बन गया है। बेरोजगारी दर 4.3% से घटकर 3.2% हुई।गुजरात और कर्नाटक के बाद झारखण्ड का स्थान।अक्तूबर-दिसंबर 2025 की तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की बेरोजगारी दर घटकर 3.2% रह गई है, जो पिछली तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 4.3% थी। इस सूची में झारखंड अब केवल गुजरात (2.3%) और कर्नाटक (2.7%) जैसे औद्योगिक राज्यों से ही पीछे है।पड़ोसी राज्यों से बेहतर झारखण्ड 3.2% ,बिहार 4.2%,ओडिशा 4.6%,उत्तर प्रदेश 5.0%।
1. कृषि क्षेत्र में बढ़ोतरी
- अक्टूबर–दिसंबर तिमाही में कृषि क्षेत्र में रोजगार की हिस्सेदारी 44.3% से बढ़कर 50.4% हो गई।
- यह संकेत देता है कि बड़ी संख्या में लोग पुनः कृषि कार्यों की ओर लौटे हैं।
- संभावित कारण: ग्रामीण क्षेत्रों में मौसमी काम, सीमित औद्योगिक अवसर, और कम कौशल आधारित रोजगार की उपलब्धता।
2. औद्योगिक और खनन क्षेत्र में गिरावट
- रोजगार हिस्सेदारी 29.2% से घटकर 26.5% रह गई।
- यह राज्य की पारंपरिक खनन-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
- कारणों में उत्पादन में कमी, तकनीकी स्वचालन या निवेश में गिरावट शामिल हो सकते हैं।
3. सेवा क्षेत्र में कमी
- सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 26.5% से घटकर 23% हो गई।
- इससे संकेत मिलता है कि शहरी क्षेत्रों में रोजगार सृजन की गति धीमी पड़ी है।
ग्रामीण–शहरी बेरोजगारी अंतर
- शहरी बेरोजगारी दर 8.1% दर्ज की गई।
- विशेषज्ञों के अनुसार, गांवों से शहरों की ओर पलायन और शहरों में नौकरी खोजने में लगने वाला समय इस अंतर का मुख्य कारण है।
पुरुषों और महिलाओं की स्थिति
शहरी पुरुष
- बेरोजगारी दर 9.3% से घटकर 6.8% हो गई।
- यह सकारात्मक संकेत है कि पुरुषों के लिए रोजगार अवसरों में सुधार हुआ है।
शहरी महिलाएं
- बेरोजगारी दर 12.5% से बढ़कर 15% हो गई।
- महिलाओं का रोजगार प्रायः मौसमी और अस्थायी होता है, जो इस बढ़ोतरी का कारण हो सकता है।
- यह लैंगिक असमानता और स्थायी रोजगार अवसरों की कमी को दर्शाता है।




