रांची : झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर भाजपा लगातार CBI जांच की मांग कर रही है, इसके लिए छात्रों को प्रेरित कर रही है। झारखंड सरकार द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में JSSC-CGL परीक्षा और TDPL द्वारा कराई गई सभी भर्तियों को रद्द करने के ऐलान के बाद भी नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का कहना है कि झामुमो-कांग्रेस सरकार में वर्ष 2020 से 2026 के बीच झारखंड में आयोजित JPSC और JSSC की लगभग हर परीक्षा में धांधली कर नौकरियां बेची गई हैं।इन सभी परीक्षाओं में हुई धांधली की CBI जांच। सरकार को CBI जांच कराने में आखिर क्या आपत्ति है? आपकी सरकार किसे बचा रही है?लेकिन छात्रों के हित के लिए CBI जांच की मांग करने वाले बाबूलाल मरांडी शायद भूल गए हैं कि झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में धांधली 2020 में नहीं बल्कि उनके ही कार्यकाल से शुरू हुई थी. JPSC में उनके परिवार से भी चयन हुआ था.पहली और दूसरी JPSC सिविल सेवा परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर CBI जांच हुई थी। ऐसे में सवाल जायज है कि जिस CBI जांच को भाजपा इतना महत्त्व दे रही है वह कितना मायने रखता है ?झारखंड हाई कोर्ट ने 2012 में जांच CBI को सौंपी थी। लेकिन CBI को चार्जशीट दाखिल करने में ही 12 साल से अधिक का समय (अक्टूबर/नवंबर 2024) लग गया।CBI जांच का अंतिम परिणाम क्या निकला? सब आज भी नौकरी कर रहे. सीबीआई जांच से छात्रों का तो कुछ भला होता नजर नहीं आ रहा स्पष्ट है कि भाजपा अपने राजनितिक लाभ के लिए छात्रों को सीबीआई जांच की मांग के लिए उकसा रही है.




