चाईबासा के सरकारी ब्लड बैंक की एक लापरवाही ने पांच आदिवासी परिवारों की जिंदगी तबाह कर दी है। एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाए जाने से छह-सात साल के ये पांचों बच्चे जिल्लत भरी जिंदगी काटने को मजबूर हैं। घटना के तत्काल बाद इन्हें सरकार की ओर से दो-दो लाख रुपए की राशि दी गई थी।लेकिन घटना के करीब दो महीने बाद उनकी जिंदगी में काफी अंतर आ गया है या यूं कहें कि हालात बद से बदतर होते जा रहे. एचआईवी संक्रमित होने के बाद एक बच्चे को मकान मालिक ने घर से निकाल दिया। एक बच्चे ने लोगों के तानों से तंग आकर खुद को घर में बंद कर दिया। वहीं एक बच्चा इतना बीमार है कि उसका स्कूल में एडमिशन तक नहीं कराया जा सका। इन बच्चों के अभिभावक भी परेशान हैं। हर परिवार न्याय मांग रहा है। वे कहते हैं-दो लाख रुपए से बच्चे की जिंदगी थोड़े ही लौटेगी। वे लोग एक करोड़ रुपए मुआवजा देने, संक्रमित खून चढ़ाने वाले दोषियों को सजा देने, परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने और बच्चों को फ्री में पढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर लिखा,HIV संक्रमित खून चढ़ाने से पीड़ित बच्चों को मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ रहा है। एक ओर स्वास्थ्य मंत्री हिजाब-नक़ाब देखकर नौकरी देने की घोषणा करते हैं, वहीं दूसरी ओर अपने ही विभाग की लापरवाही के कारण जीवन-मरण के संकट से जूझ रहे मासूम बच्चों की सुधि लेना भूल जाते हैं। जिन बच्चों को संरक्षण, इलाज और सम्मान मिलना चाहिए, वे आज तिरस्कार, उपेक्षा और अमानवीय व्यवहार झेलने को मजबूर हैं।अधिकारियों का नैतिक पतन इस कदर हो चुका है कि वे सिर्फ़ उन्हीं आदेशों का पालन करते हैं, जिसका मुख्यमंत्री आदेश देते हैं। बाकी समय लूट-खसोट और निजी स्वार्थ साधने में व्यस्त रहते हैं।@DC_Chaibasa मामले का संज्ञान लें और पीड़ित बच्चों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराएं।”




