धनबाद में कोयला चोरी के खिलाफ जब से मोर्चा खुला है, उसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां कोयला माफियाओं में भय का माहौल पैदा हो गया है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता का भरपूर समर्थन और आभार संदेश हमें लगातार मिल रहे हैं। लोग बता रहे हैं कि ईडी की कार्रवाई और हमारे ख़ुलासे के बाद ये धंधा थोड़ा धीमा हुआ है।मैं वादा करता हूँ कि मेरे द्वारा खुलासा करने से अगर चोरों में भय पैदा हुआ है तो आगे भी हम समय-समय पर जानकारी जुटा कर ये खुलासा करते रहेंगे।कई जागरूक साथियों/समर्थकों/आमलोग संपर्क कर यह जानकारी दे रहे हैं कि हमारे पिछले खुलासों में अभी भी कुछ ‘शातिर चोरों’ एवं इस काले धंधे में लगे सरकारी/ग़ैर सरकारी लोगों के नाम छूट गए हैं, जो पर्दे के पीछे रहकर इस लूट को अंजाम दे रहे हैं।मैं, आप सभी से अपील करता हूँ झारखंड की खनिज संपदा को बचाने की यह लड़ाई हम सब की है। यदि आपके पास ऐसे किसी भी कोयला माफिया या भ्रष्टाचारी की जानकारी है जिसका नाम अब तक उजागर नहीं हुआ है, तो आप बेझिझक मुझे जानकारी दें।आप मुझे मेरे व्यक्तिगत मोबाइल नंबर/व्हाटसएप /पर या यहाँ सोशल मीडिया पर Direct Message (DM) कर सकते हैं।मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आपकी पहचान गुप्त रखी जाएगी और प्राप्त सूचना के आधार पर हम इस अभियान को और तेज करेंगे। कोई भी चोर, चाहे वो कितना भी रसूखदार क्यों न हो, बच नहीं पाएगा। देर सबेर इन्हें सजा जरूर मिलेगी। देखते जाईये।
ढुल्लू महतो नाम तो सुना ही होगा आपने।अगर आपमें ज़रा-सी भी हिम्मत है, तो एक उंगली डालकर ही दिखा दीजिए। हर झारखंडी जानता है कि आप यह कर ही नहीं पाएँगे—क्योंकि पूरा देश आपके प्रिय सांसद और उनके “रसूख” से वाक़िफ़ है। उन्हें हाथ लगाने में आपकी कुर्सी और राजनीति—दोनों—दिल्ली से ही ख़त्म कर दी जाएँगी।आज जब राज्य सरकार ने इनके काले कारनामों और धंधे पर कार्रवाई शुरू की, तो आप प्रेस के सामने चंपक की कहानियाँ सुनाने लगे। भाजपा को घाटशिला में 40,000 की रिकॉर्ड हार दिलाने के बाद अगर ज़रा-सी भी शर्म होती, तो आप कुर्सी छोड़ देते। पर आप ऐसा करेंगे नहीं—यह भी सबको पता है।अब आते हैं आपके दूसरे प्रिय, एल.बी. सिंह पर।एल.बी. सिंह से आपके नाते-रिश्ते तो जगजाहिर हैं। किस चुनाव में “कितने”, और आपके “किन-किन” प्रिय साथियों ने क्या-क्या लिया—यह सब कुछ दिनों में जनता के सामने आने वाला है।




