साहेबगंज:मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विधानसभा क्षेत्र बरहेट के भोगनाडीह में ग्रामीणों को प्रदर्शन करने से रोका गया।खबर है कि पुलिस के द्वारा बल प्रयोग किया गया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए है. जानकारी के अनुसार, भोगनाडीह पार्क में शहीद सिद्धो-कान्हू के वंशजों द्वारा कार्यक्रम स्थल पर ताला बंद कर दिया गया था. ताला खुलवाने गई पुलिस के साथ आदिवासियों की झ*ड़प हो गई. पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसके जवाब में आदिवासियों ने तीर-धनुष से पुलिस पर ह*मला किया.
भाजपा नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर कहा हूल दिवस के पावन अवसर पर भोगनाडीह में पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के प्रयोग की घटना अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बर्बर कार्रवाई में कई ग्रामीणों के घायल होने की सूचना मिली है। मैंने साहिबगंज एसपी से बात कर पूरी घटना की जानकारी ली है।आज की यह बर्बरता अंग्रेज़ी हुकूमत के दौर की यादें ताज़ा कर दी है। हूल क्रांति की भूमि पर, छह पीढ़ियों के बाद एक बार फिर सिद्धो-कान्हू के वंशजों को अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध सड़क पर उतरना पड़ा है।दरअसल, घुसपैठियों की गोद में बैठी राज्य सरकार नहीं चाहती कि झारखंड का आदिवासी समाज अपने पुरखों की वीरगाथाओं और बलिदानों से प्रेरित होकर अपनी अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित हो।लेकिन सरकार की यह साजिश कभी सफल नहीं होगी। जिस तरह वीर सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने हूल क्रांति के माध्यम से अंग्रेजी सत्ता की नींव हिला दी थी, उसी तरह आज भोगनाडीह में लाठीचार्ज की दमनकारी घटना हेमंत सरकार के पतन का कारण सिद्ध होगी।




