प्रशांत किशोर: हम 3 साल में नहीं कर पाए, वो 10 दिन में ही कर गए,आखिर उनके पास कौन-सी कला है?

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prashant kishor

बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार मिलने के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर मंगलवार को पहली बार मीडिया के सामने आए।प्रशांत किशोर ने कहा ”…लेकिन बिहार की राजनीति बदलने में हमारी भूमिका ज़रूर बनी है… हमारी कोशिशों में, हमारी सोच में, समझाने में कमी रही होगी जिसके कारण जनता ने हमें नहीं चुना। अगर जनता ने हम पर भरोसा नहीं जताया, तो इसकी पूरी ज़िम्मेदारी मेरी है। मैं ये ज़िम्मेदारी 100% अपने ऊपर लेता हूँ कि जिस प्रयास के लिए हम जुड़े थे जिस प्रयास को करना चाहते थे उसपर जनता का विश्वास नहीं जीत पाया…”

JDU के 25 सीट आने पर राजनीति से सन्यास लेने के ऐलान पर उन्होंने कहा, ”मेरे पास कोई पद नहीं है, तो मुझे किस पद से इस्तीफा देना चाहिए? मैंने कभी नहीं कहा कि मैं बिहार छोड़ दूंगा, बिहार में रहेंगे। मैंने कहा था कि मैं पॉलिटिक्स नहीं करूंगा और उस बात पर कायम हूं।अगर नीतीश कुमार अपने वादे के अनुसार डेढ़ करोड़ महिलाओं को 2 लाख रुपये दे दें और साबित कर दें कि उन्होंने वोट खरीदकर नहीं जीता है, तो मैं राजनीति से सन्यास ले लूंगा इसमें कहीं कोई दिक्कत नहीं है।”

प्रशांत किशोर ने कहा, परिणाम के बाद मैने अपने लोगों को मधुबनी भेजा ,30% लोग उपेंद्र कुशवाहा के पार्टी का सिंबल नहीं जानते उनको 1 लाख के ऊपर वोट आया , आखिर ऐसी कौन-सी विधा है कि 10 दिन में की उनकी पार्टी का सिंबल घर घर पहुंच गया इतने कम समय में। हमलोग तो तीन-तीन साल से एक विधानसभा में घूम रहे लोगों को जन सूराज का चिन्ह मालूम नहीं।

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