बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के तहत भारत निर्वाचन आयोग ने राज्यभर में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरू कर दिया है. यह अभियान 25 जून से 26 जुलाई 2025 तक चलेगा, जिसके तहत बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) घर-घर जाकर मतदाताओं से जानकारी एकत्र कर रहे हैं और गणना प्रपत्र भरवा रहे हैं.झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू किए गए गहण मतदाता पुनरीक्षण बिहार चुनाव से पहले वहां अफरा-तफरी का माहौल पैदा करने की कोशिश है ताकि राष्ट्रपति शासन का प्लॉट तैयार हो सके।आरएसएस के संविधान की प्रस्तावना से समाजवाद और धर्म निरपेक्ष शब्द को हटाने की मांग को भी संविधान विरोधी करार दिया है.सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार में शुरू किए गए गहण मतदाता पुनरीक्षण में आधार कार्ड और इपिक नंबर को भी दस्तावेज के रूप में स्थान नहीं दिया गया है। ऐसे दस्तावेजों की मांग की गयी है जो 90% ग्रामीणों के पास नहीं है। इससे गरीबों, दलितों और कमाने के लिए बिहार से बाहर गए मतदाताओं के नाम कटेंगे। जिसका डायरेक्ट प्रॉफिट भाजपा को होगा।




