रांची: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कैश फॉर पीआईएल मामले में कोलकाता के कारोबारी अमित अग्रवाल को अंतरिम जमानत दे दी। यह राहत न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की खंडपीठ ने दी। अग्रवाल को तीन महीने की अंतरिम जमानत मिली है। अमित अग्रवाल की तरफ से अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और रंजीता रोहतगी ने अदालत से कहा कि मेरे क्लाइंट ने अधिवक्ता राजीव कुमार की शिकायत की थी सिर्फ इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया है। अधिवक्ता राजीव कुमार को जमानत मिल गई है, तो उन्हें भी जमानत मिलनी चाहिए।अमित अग्रवाल इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा झारखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता राजीव कुमार के साथ आरोपी हैं और एजेंसी ने हाल ही में इस मामले में दोनों को चार्जशीट किया था। रांची के बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में बंद अमित अग्रवाल को अंतरिम जमानत से बड़ी राहत मिली है।
अमित अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक एसएलपी दायर की थी जिसमें कहा गया था कि वह राजीव कुमार के खिलाफ शिकायतकर्ता थे और कोलकाता पुलिस ने राजीव कुमार को 50 लाख रुपये नकद के साथ गिरफ्तार किया था, जिसे अधिवक्ता ने शेल कंपनी से संबंधित जनहित याचिका में राहत देने के लिए उनसे वसूला था। लेकिन जब ईडी ने इस मामले को अपने हाथ में लिया तो उसने उन्हें पहला आरोपी और राजीव कुमार को दूसरा आरोपी बनाया।
अमित अग्रवाल ने तर्क दिया कि झारखंड उच्च न्यायालय ने राजीव कुमार को जमानत दे दी थी, लेकिन वह अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं। इस पर जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि अगर वकील को जमानत दी गई तो ”हम उसकी भी जमानत मंजूर करना उचित समझते हैं।”सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उनकी एसएलपी पर सुनवाई की जहां कोर्ट ने पूछा कि इस मामले में कोर्ट को उन्हें जमानत देनी चाहिए या नहीं।झारखंड के अतिरिक्त महाधिवक्ता अरुणाभ चौधरी अमित अग्रवाल की ओर से पेश हुए। यह तर्क दिया गया था कि अमित अग्रवाल को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से निकटता के कारण गिरफ्तार किया गया था।



