RANCHI : ब्राउन शुगर जानलेवा नशा है. रांची के युवा तेजी से इस नशे की चपेट में आ रहे हैं. रांची शहर का सुखदेवनगर थाना क्षेत्र ब्राउन शुगर कारोबारियों का बड़ा अड्डा बन चुका है. कोलकाता और जमशेदपुर से ब्राउन शुगर की खेप रांची पहुंचती है. इसके बाद राजधानी में मोबाइल नेटवर्किंग के माध्यम से ड्रग पैडलर खुलेआम ब्राउन शुगर का धंधा करते हैं. सुखदेवनगर थाना क्षेत्र में ड्रग पैडलर बेखौफ ब्राउन शुगर बेचता है. यहां कई बेरोजगार व आपराधिक प्रवृत्ति के युवक भी इस धंधे से जुड़े हैं. इनकी हिम्मत का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि यह घरों में लगे सीसीटीवी के सामने खड़े होकर धंधा करते हैं.स्थानीय थाने की पुलिस ने कोरम पूरा करने के नाम पर कुछ लोगों को पकड़ कर जेल भेजा. लेकिन, मुख्य सरगना को पुलिस आज तक नहीं पकड़ पायी. ड्रग बेचनेवाले बकाया पैसा लेन-देन को लेकर सड़क पर मारपीट भी करते हैं. इनके डर से क्षेत्र की महिलाएं उन इलाकों से गुजरने से भी डरती हैं.ड्रग पैडलर पहले मोबाइल के माध्यम से ऑर्डर लेता है. फिर किसी निश्चित जगह पर पहुंचकर मोबाइल से ग्राहकों को सूचित कर बुलाता है. पैसा लेकर उसे ड्रग की सप्लाई करता है. वह नये लोगों को ऑनलाइन पेमेंट लेकर ड्रग देता है. पैसा देने के बाद ड्रग पैडलर किसी माध्यम से जरूरतमंद तक ब्राउन शुगर पहुंचा देता है. इसमें सरगना का पता नहीं चलने दिया जाता है. यह जानकारी एक भुक्तभोगी ने दी. 17 वर्षीय किशोर ड्रग्स लेने के कारण मानसिक रूप से बीमार हो चुका है. डोरंडा (रांची) के रहनेवाला किशोर का रिनपास (मनोचिकित्सा संस्थान) में इलाज चल रहा है. शनिवार को उसकी मां और बहन उसको इलाज के लिए लेकर रिनपास आयी थी. परिजनों ने कहा कि उसने 11वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी. कुछ महीनों में उसके व्यवहार में बदलाव होने लगा. वह घर में अक्सर अकेले रहता था. वह बात बात में चिड़चिड़ा जाता था. बाद में बेवजह परेशान रहने लगा. पैसे की मांग करने लगा. इसके बाद परिजन उसे इलाज के लिए रिनपास ले गये. रिनपास के मनोचिकित्सक डॉ सिद्धार्थ सिन्हा बताते हैं कि पिछले तीन माह में करीब 200 से अधिक युवा इस तरह की शिकायत लेकर परिजनों के साथ आये थे. यह स्थिति चिंताजनक है.इलाजरत युवाओं का ही कहना है कि एक पुड़िया का दाम 500 रुपये लेकर 2500 तक है. शुरुआत में तो युवा इसको सूंघकर नशा करते हैं. बाद में इसके आदी होने पर इसको इंजेक्ट भी करने लगते हैं. डॉ सिन्हा का कहना है कि राजधानी के हर कोने से युवा इलाज के लिए आ रहे हैं. शहरी परिवेश के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी इसकी पहुंच बनने लगी है.



