उत्तर प्रदेश: मेरठ की जिला अदालत ने बहुचर्चित ‘नीले ड्रम’ हत्याकांड में दोनों मुख्य आरोपियों, मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला, को फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई है।यह मामला मार्च 2025 का है, जब मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए उनके शव के टुकड़ों को एक नीले प्लास्टिक ड्रम में भरकर सीमेंट और रेत के घोल से सील कर दिया गया था।अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या व सबूत मिटाने का दोषी ठहराया था। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इस जघन्य अपराध को ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (rarest of rare) श्रेणी का माना और दोनों को फांसी की सजा का ऐलान किया।मृतक सौरभ राजपूत के परिजनों और अभियोजन पक्ष ने शुरुआत से ही दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
जेल में जन्मी नवजात बच्ची साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी की ही मानी गई है, क्योंकि सौरभ के परिजनों ने अब डीएनए (DNA) टेस्ट कराने से साफ इनकार कर दिया है। सौरभ की मां ने कहा कि “अब हम दूसरे बच्चे का डीएनए टेस्ट नहीं कराएंगे। वह बच्चा साहिल और मुस्कान का ही है।”पीड़ित परिवार ने बच्ची को पूरी तरह से अपनाने से मना कर दिया है, क्योंकि उनका मानना है कि सौरभ के लंदन से लौटने के महज कुछ ही दिनों के भीतर यह हत्या कर दी गई थी।




