रांची: झारखंड राज्य में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। वहशी दरिंदे खुलेआम घूम रहे है। बुधवार को ये बातें भाजपा की राष्ट्रीय मंत्री सह रांची की मेयर डा. आशा लकड़ा (Asha Lakda) ने कही। उन्होंने कहा कि हजारीबाग जिले की चरही में, जहां एक विवाहिता के साथ घर में घुसकर दुष्कर्म करने का प्रयास किया गया और जब विवाहिता ने विरोध किया तो उसे खटिया से बांधकर जलाने का प्रयास किया गया। पीड़िता को इलाज के लिए रिम्स रांची के बर्न वार्ड में भर्ती कराया गया था। समाचार पत्रों के अनुसार, डॉ. एम सरावगी के वार्ड में पीड़िता का इलाज चल रहा था। चिकित्सक के अनुसार पीड़िता का शरीर 60-65 प्रतिशत तक जल चुका है।
हजारीबाग में इतनी बड़ी घटना हुई पुलिस-प्रशासन मौन है। रिम्स रांची में इलाजरत पीड़िता को भी बर्न वार्ड से हटाकर कहीं और भेज दिया गया है। हेमंत सोरेन की सरकार को यह भय है कि इस घटना से उनकी ख़तियानी यात्रा प्रभावित न हो जाए। क्योंकि मुख्यमंत्री के पास इस प्रकार की घटना को लेकर कोई जवाब नहीं होता। वे राज्य के मुखिया और गृह मंत्री है। राज्य में कानून व्यवस्था फेल है। इसके प्रति जिम्मेदार कौन है? सीएम साहब जवाब दीजिए? झारखंड की बेटियों के साथ इस प्रकार की घटनाएं कब तक होती रहेंगी। पुलिस-प्रशासन इस प्रकार की घटना को रोकने में विफल क्यों है? क्या राज्य सरकार के इशारे पर पुलिस-प्रशासन काम कर रही है। धिक्कार है ऐसी सरकार पर, जिसके राजकाज में वहशी दरिंदों से बेटियां घर के अंदर व बाहर असुरक्षित हैं। मैं राज्य सरकार से मांग करती हूं कि पीड़िता को न्याय दिलाएं। अपराधियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजें। साथ ही यह जानकारी दी जाए कि रिम्स के बर्न वार्ड में इलाजरत पीड़िता को किस अस्पताल में रखा गया है, ताकि उसकी जान बचाई जा सके।
Asha Lakda
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