रांची: आज नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राँची के अशोक नगर में कुछ परिवारों द्वारा लगाए गए उत्पीड़न, धमकी, रास्ता अवरुद्ध करने तथा पुलिस पदाधिकारी द्वारा पद एवं प्रभाव के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा।उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कर दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि प्रभावित परिवारों को न्याय मिल सके और कानून का शासन कायम रहे।
मामले पर एक्स पर मरांडी ने लिखा:
पुलिस व्यवस्था में कांस्टेबल, दरोगा और इंस्पेक्टर जैसे पदों पर भर्ती के दौरान शारीरिक फिटनेस को विशेष महत्व दिया जाता है, क्योंकि यही वे लोग होते हैं जिन्हें सीधे मैदान में उतरकर कानून-व्यवस्था संभालनी पड़ती है।वहीं, आईपीएस अधिकारियों के चयन में फिटनेस के साथ-साथ बौद्धिक क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता, मानसिक संतुलन और नेतृत्व क्षमता का आकलन किया जाता है, क्योंकि उनके एक आदेश पर हजारों पुलिसकर्मी काम करते हैं।ऐसे में सवाल बेहद गंभीर है कि यदि इतने बड़े पद पर बैठा कोई अधिकारी असामान्य, आवेगपूर्ण, सनकी या असंतुलित व्यवहार करने लगे, तो उसके परिणाम कितने खतरनाक हो सकते हैं? तनाव, भीड़, दंगा या किसी संकट की स्थिति में ऐसे अधिकारी का एक गलत, गैर-जिम्मेदाराना और अहंकारी फैसला पूरे समाज की शांति और सुरक्षा को आग में झोंक सकता है।एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के हाथ में ए.के.-47 कानून-व्यवस्था की रक्षा का साधन है, लेकिन यदि वही हथियार किसी असंतुलित मानसिकता, सत्ता के नशे और विवेकहीन हाथों में चला जाए, तो वह सुरक्षा का प्रतीक नहीं, समाज के लिए गंभीर खतरे की चेतावनी बन जाता है।नसीहत साफ है कि वर्दी सिर्फ ताकत नहीं देती, संयम और जवाबदेही भी मांगती है। जिस अधिकारी में मानसिक संतुलन, धैर्य और विवेक नहीं, उसके हाथ में पद भी खतरनाक है और हथियार भी।






