कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों के बाद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में “वोट चोरी” बड़े पैमाने पर हुई है और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी ने कड़ी लड़ाई लड़ी, लेकिन चुनावी प्रक्रिया में कई अनियमितताएं देखने को मिलीं।ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि उनकी लड़ाई केवल किसी एक राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि एक व्यापक तंत्र से थी, जिसमें चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम न करे और न्यायपालिका से समय पर न्याय न मिले, तो लोकतंत्र कमजोर होता है।
उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर भी शंका जताई। बनर्जी के अनुसार, मतदान के बाद भी मशीनों में 90-95 प्रतिशत तक चार्ज रहना तकनीकी रूप से सवाल खड़े करता है, जबकि सामान्यतः यह स्तर काफी कम होना चाहिए। इस मुद्दे पर उन्होंने पारदर्शिता और जांच की मांग की।मुख्यमंत्री ने चुनाव के दौरान अपने साथ हुई कथित घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मतदान केंद्र में प्रवेश करने से रोका गया और केंद्रीय बलों व चुनाव अधिकारियों के माध्यम से उनके कार्यकर्ताओं को परेशान किया गया। बनर्जी ने दावा किया कि उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और उनके एजेंट के साथ मारपीट हुई।
राजनीतिक समर्थन को लेकर ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें विपक्षी गठबंधन INDIA के कई प्रमुख नेताओं का समर्थन मिला है। उन्होंने बताया कि Sonia Gandhi, Rahul Gandhi, Arvind Kejriwal, Uddhav Thackeray, Akhilesh Yadav, Tejashwi Yadav और Hemant Soren ने उन्हें फोन कर समर्थन जताया है। उन्होंने कहा कि गठबंधन के सभी साथी उनके साथ खड़े हैं और आने वाले समय में विपक्ष की एकजुटता और मजबूत होगी।उन्होंने विशेष रूप से अखिलेश यादव के जल्द कोलकाता आने की संभावना का भी जिक्र किया और कहा कि विपक्षी नेताओं का उनसे मिलना जारी रहेगा। बनर्जी ने कहा कि अब उनका लक्ष्य INDIA गठबंधन को मजबूत करना है और वह एक “आम आदमी” की तरह काम करेंगी।
अपने व्यक्तिगत जीवन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने 15 वर्षों में न तो पेंशन ली और न ही वेतन का लाभ उठाया। अब वह खुद को “आज़ाद पंछी” मानती हैं और पूरी तरह जनता की सेवा में समर्पित हैं।इस्तीफे के सवाल पर ममता बनर्जी ने साफ कहा कि वह पद नहीं छोड़ेंगी। उन्होंने कहा, “मैं हारी नहीं हूं और मैं राजभवन नहीं जाऊंगी। यह सवाल ही नहीं उठता।” उन्होंने यह भी कहा कि आधिकारिक रूप से उन्हें हराया जा सकता है, लेकिन नैतिक रूप से उनकी जीत हुई है।इन बयानों के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और विपक्षी एकता जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस के केंद्र में रहने की संभावना है।




