ट्विटर के ब्लू टिक के लिए यूजर्स से सौदा करना Elon Musk को पड़ा मंहगा, koo app ने 50 मिलियन डाउनलोड का आंकड़ा किया पार

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एलन मस्क द्वारा ट्विटर के ब्लू टिक के लिए यूजर्स को हर महीने 660 रुपये का भुगतान करने की घोषणा के बाद काफी यूजर्स नाराज हैं. वहीं भारत के माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म koo app के सह-संस्थापक ने अप्रमेय राधाकृष्ण ने ट्विटर पर ट्विटर के यूजर्स को कू पर आने की बात कही है.उन्होंने कहा है कि koo app अपने यूजर्स से वैरिफिकेशन के 1600 रुपयये का शुल्क नहीं लेगा.जिसके साथ ही भारतीय माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म कू ने 50 मिलियन (5 करोड़) डाउनलोड का आंकड़ा पार कर लिया है.जिससे पता चलता है कि एलन मस्क का फैसला किसी भी यूजर को बिलकुल नहीं भाया है और ट्विटर यूजर्स धीरे- धीरे दूसरे प्लेटफॉर्म की स्थानांतरित हो रहे हैं। जो कि एलन मस्क को काफी मंहगा सौदा मालूम पड़ता है। क्योंकि जाहिर सी बात है अगर ट्विटर कि सुविधाएं किसी और प्लेटफॉर्म पर यूजर्स को अगर मिल ही जाती है तो वो कभी भी अपने पैसे ट्विटर पर फालतू में खर्च नहीं करना चाहेंगे

इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए koo app के सीईओ और सह-संस्थापक अप्रमेय राधाकृष्ण ने कहा कि 5 करोड़ डाउनलोड का मील का पत्थर पार करने पर हम काफी उत्साहित महसूस कर रहे हैं। यह ‘सबसे पहले भारत’ को ध्यान में रखते हुए बनाए गए एक बहुभाषी सोशल मीडिया नेटवर्क पर दैनिक विचारों को साझा करने में अलग-अलग जुबान बोलने वाले भारतीयों को शामिल करने की मांग की पुष्टि करता है। हमारे मंच की तेजी से होती बढ़ोत्तरी और इसे अपनाया जाना इस बात का प्रमाण है कि हम एक अरब भारतीयों की समस्या का समाधान कर रहे हैं।एमएलके (मल्टी-लैंगुएज कूइंग), लैंग्वेज कीबोर्ड, 10 भाषाओं में टॉपिक्स, भाषा अनुवाद, एडिट फंक्शन और मुफ्त सेल्फ-वेरिफिकेशन जैसे फीचर्स, इस मंच को खास बनाते हैं और अपने यूजर्स को सार्थक चर्चा में जुड़ने की आजादी प्रदान करते हैं। आने वाले वक्त में प्लेटफॉर्म का मकसद यूजर्स के अनुभव को बेहतर करने की अपनी लगातार कोशिश के सिलसिले में और नए फीचर्स की घोषणा करना है।अप्रमेय ने कहा, “आगे बढ़ने की काफी संभावनाएं हैं। देश में लगभग 80 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हैं, जिनमें से अधिकांश अपनी मूल भाषा में खुद को अभिव्यक्त करना चाहते हैं। उनके विचारों का आदान-प्रदान बंद समूहों और ज्ञात लोगों तक ही सीमित है और खुले इंटरनेट में स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने और खोजे जाने में असमर्थ हैं। हमें 90% देशी भाषा बोलने वाले भारतीयों के लिए समावेशी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सक्षम करने के हमारे मिशन पर गर्व है।बता दें कि वर्तमान में, कू ऐप हिंदी, मराठी, गुजराती, पंजाबी, कन्नड़, तमिल, तेलुगु, असमिया, बंगाली और अंग्रेजी सहित 10 भाषाओं में उपलब्ध है।

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