रांची : झारखंड हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने 12 अक्तूबर 2026 को JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, CDPO (बाल विकास परियोजना पदाधिकारी) और FSO (फूड सेफ्टी ऑफिसर) नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।सरकार की ओर से महाधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में एक स्टेटस रिपोर्ट सौंपी। सरकार और JPSC ने दलील दी कि CID जांच के दस्तावेजों के अनुसार परीक्षा में बड़े पैमाने पर और व्यवस्थित तरीके से (सिस्टमैटिक) अनियमितता हुई है, जिससे इसकी शुचिता भंग हुई। ऐसी स्थिति में सफल अभ्यर्थियों में से असली दोषियों और निर्दोषों की पहचान कर पाना नामुमकिन है, इसलिए पूरी परीक्षा को रद्द करना ही सही फैसला था।अभ्यर्थियों और उनके वकीलों ने सरकार के इस कदम को पूरी तरह असंवैधानिक और राजनीतिक दबाव में लिया गया निर्णय बताया। उन्होंने तर्क दिया कि सफल उम्मीदवारों के खिलाफ न तो कोई FIR हुई है, न किसी को समन भेजा गया है और न ही पैसों के लेनदेन (मनी ट्रेल) या पेपर लीक का कोई ठोस सबूत मिला है। साथ ही यह भी कहा गया कि परीक्षा रद्द करने या विज्ञापन वापस लेने का अधिकार केवल JPSC को है, न कि सीधे राज्य सरकार को।मामले में कुछ हस्तक्षेपकर्ताओं ने दलील दी कि प्रिंटिंग मशीन के स्तर से प्रश्नपत्र लीक हुआ था, जो बाद में सोशल मीडिया (व्हाट्सऐप) पर वायरल हुआ।हाईकोर्ट ने फिलहाल सफल अभ्यर्थियों और कर्मचारियों की नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश पर पहले से लगी अंतरिम रोक (Stay) को बरकरार रखा है, यानी अभ्यर्थियों को दी गई राहत अभी भी लागू रहेगी। अदालत ने दोनों पक्षों को बहस का संक्षिप्त लिखित नोट (शॉर्ट रिटेन नोट) दाखिल करने की अनुमति दी है.




