रांची। कभी बिजली संकट और कटौती से जूझने वाला झारखंड अब ऊर्जा क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव का कारवां चल पड़ा है.झारखण्ड अपनी जरूरतों को पूरा कर 200 MW बिजली प्रतिदिन दूसरे राज्यों को बेच रहा है।शहरों में 22 घंटे और गांवों में 20-21 घंटे तक बिजली की निर्बाध आपूर्ति बदलते झारखण्ड की नई पहचान बता रहा है.
राज्य अब गर्मियों जैसे उच्च मांग वाले मौसम में भी अपनी जरूरत पूरी करने के बाद अतिरिक्त बिजली राष्ट्रीय ग्रिड के माध्यम से दूसरे राज्यों को बेचने लगा है। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) प्रतिदिन करीब 200 मेगावाट बिजली राष्ट्रीय ग्रिड को 7.05 रुपये प्रति यूनिट की दर से बेच रहा है।झारखंड ने बिजली के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव दर्ज किया है। मांग से अधिक उत्पादन और बेहतर प्रबंधन के दम पर राज्य अब उपभोक्ता से सप्लायर की भूमिका में आ चुका है, जो इसकी ऊर्जा नीति और बुनियादी ढांचे में सुधार का स्पष्ट संकेत है।जेबीवीएनएल के महाप्रबंधक संजय सिंह से मिली जानकारी के अनुसार राज्य में इस समय बिजली की मांग लगभग 2200 मेगावाट है, जबकि उपलब्धता 2400 मेगावाट से अधिक बनी हुई है।
ऊर्जा क्षेत्र में आए बदलाव के पीछे पतरातू थर्मल पावर प्लांट की अहम भूमिका है। पतरातू परियोजना की पहली यूनिट से उत्पादन शुरू होने के बाद राज्य की आपूर्ति क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब पतरातू की दूसरी यूनिट का ट्रायल भी शुरू हो गया है, जिसकी उत्पादन क्षमता 800 मेगावाट होगी। करार के तहत झारखंड को 685 मेगावाट बिजली मिलने लगेगी। पहली यूनिट से इतनी ही बिजली मिल रही है। नंबर एक और दो, दोनों यूनिटों की संयुक्त क्षमता 1600 मेगावाट होगी और झारखंड को 685 से बढ़कर 1370 मेगावाट बिजली मिलने लगेगी।पतरातू परियोजना के अनुसार पहले चरण में 800-800 मेगावाट क्षमता वाली तीन यूनिटों से कुल 2400 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा, जिसका 85 प्रतिशत झारखंड को मिलेगा। दूसरे चरण में दो और यूनिट लगेंगी और कुल उत्पादन क्षमता 4000 मेगावाट तक पहुंच जाएगी। पतरातू से राज्य को 5 से 5.5 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है।


