केंद्र सरकार के पास लंबित मामलों झारखंड सरकार ने रखा नीति आयोग के समक्ष, बकाया भुगतान की मांग

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बीते दिन 26 अक्टूबर को नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने रांची में झारखंड सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक की.इस बैठक में कई मामले रखे गए जिसमें बकाया भी शामिल है. बैठक में झारखंड सरकार ने जीएसटी कंपनसेशन के रूप में 1880 करोड़ बकाया देने के साथ राज्य में 53 हजार एकड़ जमीन जो कोयला कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है इसके एवज में बतौर टैक्स आठ हजार करोड़ और वास्ड कोल पर रॉयल्टी के रूप में 22 हजार करोड़ की मांग की गयी है.वहीं ऊर्जा मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, रेलवे मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय के पास राज्य सरकार के कई प्रस्ताव भी लंबित हैं. इन प्रस्ताओं में मंजूरी को लेकर नीति आयोग से आग्रह किया गया है.

केंद्र सरकार के पास लंबित मामलों की बात करें तो राज्य के विभिन्न स्थानों में बन रहे आरओबी निर्माण पर राज्य सरकार और रेलवे 50:50 का खर्च वहन करते हैं, जबकि राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण का भी खर्च वहन करना पड़ता है. राज्य सरकार द्वारा 50:50 का खर्च भूमि अधिग्रहण व यूटिलिटी शिफ्टिंग समेत वहन करने का आग्रह किया गया है.दूसरा मामला राज्य पर डीवीसी का बकाया 5000 करोड़ का मामला है.जिसमें त्रिपक्षीय समझौता हुआ था और बिना राज्य सरकार की सहमति से ही राज्य के खाते से पैसे काट लिये गये. राज्य सरकार की कैबिनेट द्वारा त्रिपक्षीय समझौता से बाहर निकलने का फैसला किया गया. वहीं मासिक बिल 170 करोड़ रुपये डीवीसी को देने का फैसला किया गया. पैसा काटने पर राज्य सरकार ने एतराज जताया है.नीति आयोग के समक्ष भी मामला उठाया गया है. राज्य में स्थित केंद्र सरकार के उपक्रम व कार्यालयों पर झारखंड बिजली वितरण निगम का बकाया है. नीति आयोग के पास मामला रखा गया है कि बकाये का भुगतान कराया जाये.

झारखंड में दो जगहों पर कौशल विद्या एकेडमी की स्थापना का प्रस्ताव है. राज्य सरकार भूमि का खर्च वहन करने के लिए तैयार है, पर बाकी के शत-प्रतिशत खर्च वहन का आग्रह केंद्र सरकार से किया गया है. नीति आयोग इस मामले के समाधान में जुटा है. कुपोषण से मुक्ति के लिए 312 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गयी है. केंद्र से राशि रिलीज करने की मांग की गयी है.

वर्ष 2017 तक राज्य के 16 उग्रवाद प्रभावित (एलडब्ल्यूइ) जिलों को स्पेशनल सेंट्रल असिस्टेंस स्कीम में शामिल किया गया था. लेकिन वर्ष 2021-22 में इस योजना के तहत केवल आठ जिलों को ही शामिल किया गया है. केंद्र सरकार से अगले पांच वर्षों तक सभी 16 जिलों को इस योजना में शामिल करने की मांग की गयी है. साथ ही फंड रिलीज करने की मांग भी रखी गयी है.झारखंड जियो टैगिंग नहीं होने से 1.5 लाख आवास सर्वे में शामिल नहीं किये जा सके. डाटा इश्यू के कारण दो लाख आवास मंत्रालय के डाटा से हटा दिये गये. मंत्रालय से आवासों के जियो टैगिंग की अनुमति देने और डाटा के रिवेरीफिकेशन की मांग की गयी है.जीएसटी कंपनसेशन का 1887 करोड़ रुपये बकाया है. केंद्र से कंपनसेशन की मांग की गयी है, पर भुगतान नहीं हुआ है.

कोयला मंत्रालय में कोयले की रॉयल्टी का मामला लंबित है. एमएमडीआर एक्ट में कोयले के मूल्य का 14 प्रतिशत रॉयल्टी देने का प्रावधान है, लेकिन कोल इंडिया द्वारा कोयले के बिक्रय मूल्य के आधार पर रॉयल्टी का भुगतान नहीं किया जा रहा है.राज्य सरकार द्वारा बिक्रय मूल्य के आधार पर रॉयल्टी के निर्धारण की मांग की गयी है. कोल इंडिया से बिक्रय मूल्य से रॉयल्टी भुगतान की मांग की गयी है.कोयला कंपनियों द्वारा राज्य में करीब 53 हजार एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया है. लैंड यूज के तहत टैक्स का 8000 करोड़ रुपये इन कंपनियों पर बकाया है. बकाया भुगतान का मामला लंबित है.वास्ड कोल पर रॉयल्टी नहीं दी जा रही है. जिस कारण बकाया बढ़कर 22000 करोड़ रुपये हो गया है. सीसीएल और बीसीसीएल से राशि के भुगतान की मांग की गयी है.

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