पिछले साल खरीफ के मौसम में अच्छी बारिश नहीं होने के कारण राज्य में सुखाड़ के हालात बन गए थे. झारखंड में लगातार दूसरे साल भी सुखाड़ हालात हैं.झारखंड सरकार के प्रतिनिधियों का कहना है कि तय अवधि तक लक्ष्य के बराबर राज्य में धनरोपनी नहीं हुई है.धान की रोपाई के मामले में राज्य के 24 में से आठ जिलों में स्थिति गंभीर है. पलामू जिले में सबसे कम (2.96 फीसदी) धान की रोपाई हुई है.राज्य के आठ जिलों में कम के बारिश के कारण 80 प्रतिशत से अधिक कृषि योग्य भूमि पर अब तक धान की रोपाई नहीं हो पायी है. केंद्र सरकार ने कई राज्यों के अधिकारियों को दिल्ली में बुलाकर खरीफ में खेती की स्थिति की जानकारी ली थी.राज्य सरकार ने केंद्र को बता दिया है कि राज्य में लगातार दूसरी बार सुखाड़ की स्थिति हो गयी है.राज्य सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा बताया था कि रोपा का समय 15 अगस्त तक है. केंद्र सरकार ने 30 अगस्त तक इंतजार करने को कहा है साथ ही राज्य सरकार को रिपोर्ट देने को कहा है.मॉनसून देर से आने के कारण बिचड़ा देर से लगने की वजह से कई जिलों में अब भी किसान धनरोपनी कर रहे हैं.15 अगस्त तक 40 फीसदी खेतों में तय लक्ष्य के बराबर धनरोपनी नहीं हो पायी.खरीफ के मौसम में लगातार दूसरे साल समय पर बारिश नहीं हुई है. इस कारण राज्य सरकार ने जो धान लगाने का लक्ष्य रखा था, वह पूरा नहीं होता नहीं दिख रहा है.धान की रोपाई का सही समय एक जुलाई से 31 जुलाई तक माना जाता है.झारखंड में 20 अगस्त तक 45 प्रतिशत धान की कुल रोपाई हुई है. धान की रोपाई के मामले में राज्य के 24 में से आठ जिलों में स्थिति गंभीर है.



