रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) प्रमुख व राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन ने गुरुवार को रांची के स्टेट गेस्ट हाउस में झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन की बैठक की अध्यक्षता की.एक बैठक के दौरान संघ के कामकाज का विस्तार करने, कंपनियों के खनन के कारण मजदूरों के विस्थापन और एक सदस्यता अभियान शुरू करने और सेंट्रल कोलफील्ड्स, बीसीसीएल, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, दामोदर घाटी निगम ( डीवीसी), बोकारो स्टील, टाटा स्टील, इलेक्ट्रोस्टील, एसीसी, टाटा मोटर्स और कई अन्य कंपनियों पर चर्चा हुई।बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि झारखंड राज्य में राज्य रोजगार नीति के क्रियान्वयन के तहत श्रमिक विस्थापन एवं 75 प्रतिशत आरक्षण के लिए व्यापक अभियान चलाया जायेगा.इससे पहले भाजपा के नेतृत्व वाली रघुबर दास सरकार ने वर्ष 2015, 2018 और 2019 में 44 श्रम कानून पारित किए थे, जिनमें से 29 कानून निजी कंपनियों और पूंजीपतियों के पक्ष में थे, जिन्हें झामुमो के नेतृत्व वाली हेमंत सोरेन सरकार ने रद्द कर दिया था।बैठक में संघ के सदस्यों ने प्रस्तावित न्यूनतम श्रम वेतन 25000 रुपये प्रति माह होना चाहिए।’समान कार्य के लिए समान वेतन नीति’ के अनुसार बैठक में यह भी निर्णय लिया गया किभाजपा के नेतृत्व वाली रघुबर दास सरकार ने भूमि दलालों, नौकरशाहों और अन्य भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक भूमि बैंक का प्रस्ताव रखा, जो झामुमो के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों की सूची में है, ताकि इससे बचा जा सके।केंद्रीय समिति की बैठक में झारखंड राज्य के उपाध्यक्ष मथुरा प्रसाद महतो, विजय हांसदा, महासचिव फागू बेसरा, संगठन सचिव विनोद पाण्डेय, शैलेन्द्र कुमार सहित अन्य उपस्थित थे.



