लोककल्याणकारी राज के तहत हेमंत सोरेन ने बजट बनाने से पहले लोगों से राय लेने की पहल शुरू की है. इसे सरकार द्वारा हमीन कर बजट नाम दिया गया. पहली बार पारा शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं के मानदेय बढ़ोतरी बढ़ाया गया. सभी वर्ग के बच्चों के इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ इत्यादि की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थानों के खर्च वहन करने की पहल शुरू की गीय. गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 15 लाख रुपये तक की शिक्षा लोन दिया जा रहा है. पहली बार अनूसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, पिछडा और अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों को सरकार अपने खर्च पर उच्च शिक्षा के लिए विदेश भेज रही है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि पिछले 20 वर्षों के इतिहास में हमारे विरोधियों ने राज्य को दिशा देने का काम किया लेकिन काम कितना हुआ, सभी देख रहे हैं। हमारे काम करने का तरीका अलग है। कई लोगों को उदाहरण मिल गया होगा सड़कों पर निकलकर लोग सरकार का आभार व्यक्त कर रहे हैं। अबीर-गुलाल लगा रहे हैं। सरकार की सोच है कि हर कर्मचारी के चेहरे पर मुस्कान हो, हर वर्ग को न्याय मिले, राज्य के हर कोने में पुलिसकर्मियों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, पारा शिक्षकों, ओल्ड पेंशन योजना के लाभुकों से पूछ लीजिए। विपक्षी पार्टियों ने 20 वर्षों से राज्य को चारागाह बनाया लेकिन अब राज्य की दिशा भी सुरक्षित दिख रही है और दशा भी मजबूत आदिवासी वर्ग के युवा विदेशों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं लेकिन कुछ लोगों को यह बात रास नहीं आ रही है, उनके पेट में दर्द हो रहा है। ये हर वक्त सिर्फ राजनीतिक टीका-टिप्पणी में लीन रहते हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि आंगनबाड़ी सेविका- सहायिकाओं के लिए आज तक राज्य में नियमावली नहीं बनी थी। इनकी मांगों के अनुरूप नई नियमावली के तहत आंगनबाड़ी सेविकाओं को 9500 रुपए और आंगनबाड़ी सहायिकाओं को 4750 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 2700 रुपए एवं राज्य सरकार की ओर से 6800 रुपए की साझेदारी रहेगी। इसी प्रकार आंगनबाड़ी सहायिकाओं को केंद्र सरकार की ओर से 1350 रुपए एवं राज्य सरकार की ओर से 3400 रुपए की साझेदारी का प्रावधान किया जा रहा है।



