स्कूल की फीस भरने के लिए कोठियों में बर्तन बेचते थे गुलशन ग्रोवर, कभी-कभी सो जाते थे भूखे

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groverहिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता  और ‘बैडमैन’ के नाम से मशहूर गुलशन ग्रोवर सोमवार को अपना 65वां जन्मदिन मनाएंगे। गुलशन ग्रोवर हिंदी सिनेमा के टॉप कलाकारों में से एक हैं। बॉलीवुड में जब भी खलनायकों की बात की जाती है तो उसमें एक नाम गुलशन ग्रोवर का भी आता है। उन्होंने बॉलीवुड में उन्हें हर बार लगभग एक जैसे किरदार मिले हैं लेकिन उनके दमदार अभिनय ने उन्हें अलग बना दिया। गुलशन ग्रोवर ने अभिनय की दुनिया तक पहुंचने के लिए काफी संघर्ष किया। इस बात का खुलासा उन्होंने अपनी किताब ‘बैडमैन’ में किया है। उनके जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनसे जुड़ी बातें… गुलशन ग्रोवर का जन्म 21 सितंबर 19551 को नई दिल्ली में मध्यम वर्गीय पंजाबी परिवार में हुआ था। उन्होंने दिल्ली में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद श्री राम कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। बचपन से ही गुलशन ग्रोवर का सपना था कि वह एक्टर बनें। इसके लिए उन्होंने अभिनय का रास्ता चुना। इस उद्देश्य के लिए, 80 के दशक के अंतिम वर्षों में गुलशन ग्रोवर मुंबई चले गए थे।मुंबई पहुंच कर गुलशन ग्रोवर की जिंदगी संघर्षों भरा है। इस बात का खुलासा उन्होंने अपनी किताब ‘बैडमैन’ में किया है। उनकी किताब ‘बैडमैन’ पिछले साल आई थी। इस किताब को रोशमिला भट्टाचार्य ने लिखा है। किताब में गुलशन ग्रोवर ने अपनी जिदंगी के उन लम्हों को भी साझा किया है जब उनके और उनके परिवार के पास खाने के लिए पैसे नहीं थे। वह कई बार भूखे सो जाते थे।

इतना ही नहीं अपनी पढ़ाई के लिए गुलशन ग्रोवर कोठियों में बर्तन बेचते थे। इसे बेचकर वे अपने स्कूल की फीस भरा करते थे और पढ़ाई का खर्च देखते थे।  एक इंटरव्यू के दौरान गुलशन ग्रोवर ने बताया था कि वो सुबह से ही बस्ते में स्कूल की यूनिफॉर्म रखकर घर से निकल जाते थे और घर से दूर बड़ी-बड़ी कोठियों में बर्तन और कपड़े धोने वाला डिटर्जेंट पाउडर बेचा करते थे. इस दौरान वो कभी डिटर्जेंट तो कभी फिनाइल की गोलियां, पोछे बेचकर पैसा कमाते थे। इससे वे स्कूल का खर्च निकालते थे।  गुलशन ने बताया था कि कोठियों में रहने वाले लोग भी उनका सामान खरीद लिया करते थे। क्योंकि वो भी चाहते थे कि गुलशन अपनी आगे की पढ़ाई पूरी कर सके। वो अपनी गरीबी से कभी घबराए नहीं। इसकी वजह उनके पिता थे। एक्टर के पिता ने उन्हें ईमानदारी और मेहनत के रास्ते पर चलना सिखाया।गुलशन ग्रोवर को सुनील दत्त द्वारा निर्देशित फिल्म रॉकी में एक छोटी सी भूमिका निभाने का मौका मिला। फिल्म सुपरहिट साबित हुई, लेकिन इसके बाद भी गुलशन ग्रोवर अपने लिए खास पहचान नहीं बना पाए। वर्ष 1983 गुलशन ग्रोवर के करियर में महत्वपूर्ण वर्ष साबित हुआ। इस वर्ष उनकी ‘सदमा’ और ‘अवतार’ जैसी फिल्में आईं। फिल्म ‘अवतार’ में उन्होंने अभिनेता राजेश खन्ना के बेटे की भूमिका निभाई। फिल्म में उनकी भूमिका कुछ हद तक ग्रे शेड्स की थी। गुलशन ने इस फिल्म से सभी का ध्यान आकर्षित किया। 1989 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘राम लखन’ गुलशन ग्रोवर के करियर की महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुई।सुभाष घई द्वारा निर्देशित फिल्म में, गुलशन ग्रोवर को एक ‘खलनायक’ के रूप में एक छोटी सी भूमिका निभाने का अवसर मिला। किरदार का नाम केसरिया विलायती था। इस फिल्म में उनका बोला गया संवाद बैडमैन दर्शकों के बीच बहुत लोकप्रिय हुआ। इसके बाद, वह उसे बैड मैन के रूप में जानते थे। इसके बाद, उन्होंने हर फिल्म के साथ एक नई पहचान बनाई।

गुलशन ग्रोवर को फिल्म आई एम कलाम के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला है। फिल्म ‘राम लखन’ की सफलता के बाद गुलशन ग्रोवर को अब बड़े बजट की फिल्मों में बतौर मुख्य खलनायक काम मिलना शुरू हो गया। इन फिल्मों में मुजरिम ‘जंगबाज’, ‘दूध का कर्ज’, ‘इज्जत’, ‘सौदागर’, ‘मां’, ‘शोला और शबनम’ जैसी सुपरहिट फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों की सफलता के बाद गुलशन ग्रोवर बतौर खलनायक फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गये। वर्ष 1993 में प्रदर्शित फिल्म ‘सर’ गुलशन ग्रोवर के सिने करियर की एक और सुपरहिट फिल्म साबित हुयी। महेश भट्ट के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उनके किरदार का नाम था ‘छप्पन टिकली’। फिल्म में अपनी दमदार भूमिका के लिये गुलशन ग्रोवर अपने करियर में पहली बार सर्वश्रेष्ठ खलनायक के फिल्म फेयर पुरस्कार से नामांकित किये गये। साल 1997 में गुलशन ग्रोवर को अंग्रेजी फिल्म ‘जंगल बुक’ की दूसरी कड़ी में काम करने का अवसर मिला, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्ति हुई। इसी साल उनकी लोकप्रियता को देखते हुये वाशिंगटन की एक कंपनी से उन्हें विज्ञापन करने का प्रस्ताव मिला। यह हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा पहला मौका था जब किसी भारतीय अभिनेता को विदेशी कंपनी द्वारा विज्ञापन में काम करने का अवसर मिला। इसके बाद गुलशन ग्रोवर को हॉलीवुड फिल्मों में भी काम करने का अवसर प्राप्त हुआ। इन फिल्मों में इस्ट साइड ‘टेल स्टिंग’, ‘मानसून’, ‘वीपर’, ‘इन द शैडोज ऑफ द कोबरा’, ‘वी आर नो मांकस’, ‘अमेरिकन डे लाइट’, ‘माई बॉलीवुड ब्राइड’, ‘बलांइड एंबिशन’जैसी कई फिल्में शामिल है।
फिलहाल गुलशन 3 फिल्मों में काम कर रहे हैं। इनमें ‘सड़क 2’, ‘मुंबई सागा’, सुर्यवंशी जैसी बड़ी फिल्में शामिल हैं।