Governor Ramesh Bais removed the complaints from Jharkhand, told Hemant a ‘good leader’
झारखंड के रहने वाले बिहारियो का क्या होगा अगर 1932 लागू हो जाता तो
राज्यपाल रमेश बैस ने झारखंड से विदा लेने से पहले सारे गिले शिकवे ख़त्म कर देना चाहते थे ओर सारे संशयों पर से पर्दा हटा देना चाहते थे जो उन्होंने झारखंड के राज्यपाल रहते में बनाए थे I उन्होंने बुधवार को मीडिया से बड़ी बेबाकी से बातचीत की , इस दौरान रमेश बैस ने 1932 खतियान विधेयक को लौटाने से लेकर चुनाव आयोग के लिफाफे तक सबका जवाब दिया I 1932 के खतियान को लेकर राज्यपाल रमेश बैस ने कहा कि सरकार को विचार करना चाहिए कि 1932 का खतियान लागू करने के बाद उन जिलों में क्या हालत होंगे, जहां बिहार के लोगों की संख्या ज्यादा है. आखिर झारखंड राज्य का गठन बिहार से अलग कर ही किया गया था I अब सवाल यह खड़ा होता है कि झारखंड में जब बिहार को अलग किया गया था तो इसी मकसद से किया गया था कि बाकी राज्यों की तरह झारखंड का भी अपना स्थानीयता , नियोजन नीति सब कुछ होगा , झारखंड के लोगो को ही इस राज्य का ज्यादा से ज्यादा लाभ मिलेगा , लेकिन रमेश बैस के इस जवाब ने साफ कर दिया है की उन्हे लाया ही इसलिए गया था की वो इस राज्य के जनहित से जुड़े मुद्दे , आदिवासियों से जुड़े मुद्दे मामलो पर अपने शक्ति का इस्तेमाल कर यहां के आदिवासियों जनजातियों के विकास में रोड़ा लगा सके ताकि मौजूदा सरकार बदनाम हो सके I
लिफाफा नहीं खोलने से कायम सियासी संशय और भाजपा के साथ मिलकर सरकार गिराने की साजिश में शामिल होने के आरोपों पर राज्यपाल रमेश बैस ने कहा कि अगर मेरी ऐसी नियत होती तो मैं चुनाव आयोग के मंतव्य के आधार पर फैसला ले चुका होता , मैं सरकार को अस्थिर नहीं करना चाहता था इसीलिए लिफाफे का राज अपने साथ ले जा रहा हूं I अब गेंद नए गवर्नर के पास चली गयी है , राज्यपाल रमेश बैस ने कहा कि पहले 2 साल जिन भी कारणों से हेमंत सरकार ने जितना काम नहीं किया, उतना लिफाफा आने के बाद से करने लगे ऐसे में मैंने राज्य के हित में फैसला लेना उचित समझा I अब सवाल यह खड़ा होता है की अगर लिफाफा में कुछ ऐसा था जिससे हेमंत सरकार गिर सकती थी या अस्थिर हो सकती थी लेकिन बावजूद इसके उन्होंने लिफाफा नही खोला जैसा वो बता रहे है तो अब यह समझा जा सकता है की जिस राज्य में भाजपा की सरकार नही है उस राज्य के सरकार को किसी भी तरह से डरा धमका के रखा जा सके और अपने मन मुताबिक काम करवाया जा सके I
राज्यपाल रमेश बैस ने कहा कि हेमंत अच्छे लीडर है. मैंने लिफाफे को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अवगत करा दिया था कि आप बेहतर काम कर रहे है. निश्चिंत होकर अपना काम करे. रमेश बैस के इस बात से यह साफ हो जाता है कि उन्होंने भी हेमन्त का लोहा मान लिया था और कही न कहीं वह भी इस बात को समझ चुके थे की इन्हे झुकाया नहीं जा सकता है I
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