new delhi : दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की नियुक्ति को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज करने के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका आज खारिज कर दी।न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विकास महाजन की खंडपीठ ने पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए कहा, याचिकाकर्ता रिकॉर्ड के सामने कोई स्पष्ट त्रुटि दिखाने में असमर्थ है। तद्नुसार याचिका खारिज की जाती है।
अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह समीक्षा याचिका समीक्षा के रूप में प्रच्छन्न अपील है क्योंकि यह समीक्षा के दायरे में नहीं आती है।पिछले हफ्ते दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ ने एक समीक्षा याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया और कहा, हमने इस जनहित याचिका को खारिज करने का आदेश पारित किया था, यह उचित होगा कि समीक्षा याचिका पर कोई अन्य पीठ सुनवाई करे।
new delhi : इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने याचिका को प्रचार हित याचिका करार दिया था और याचिकाकर्ता संजीव कुमार तिवारी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। याचिकाकर्ता ग्राम उदय फाउंडेशन नामक संस्था का अध्यक्ष बताया जाता है।पीठ ने कहा था, ‘मौजूदा याचिका केवल प्रचार हासिल करने के लिए दायर की गई है, इसमें कोई सामग्री नहीं है।’याचिकाकर्ता ने दलील दी कि सीजेआई चंद्रचूड़ की नियुक्ति संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर की गई है। उन्होंने नियुक्ति पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी।उन्होंने यह पता लगाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जांच की भी मांग की कि नए सीजेआई का नक्सली ईसाई आतंकवादियों और राष्ट्र-विरोधी के साथ कोई संबंध नहीं है।9 नवंबर, 2022 को न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित के पद छोड़ने के बाद न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।भारत के सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ देश की न्यायपालिका के 50वें प्रमुख बन गए हैं। उनका कार्यकाल 10 नवंबर 2024 तक रहेगा।जस्टिस चंद्रचूड़ के पिता जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ 2 फरवरी, 1978 से 11 जुलाई, 1985 तक सेवारत भारत के 16वें मुख्य न्यायाधीश थे।न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि पिता और पुत्र दोनों सीजेआई बने हैं.
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