सिर्फ़ एक कुर्सी के लिए पूरे संविधान को कुचलने वाली कांग्रेस आज “संविधान बचाओ” की रैली कर रही

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babulal

झारखण्ड: भाजपा नेता प्रति पक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर कांग्रेस को घेरते हुए लिखा ”जो कांग्रेस आज “संविधान बचाओ” की रैली कर रही है, उसी पार्टी ने 1975 में पूरे संविधान को कुचल दिया था, सिर्फ़ एक कुर्सी बचाने के लिए। और वो कुर्सी थी इंदिरा गांधी की।जब कोर्ट ने उनके चुनाव को अवैध ठहराया, तो उन्होंने सत्ता छोड़ने की बजाय पूरे देश पर इमरजेंसी थोप दी। प्रेस की आज़ादी खत्म, विपक्ष जेल में, नागरिक अधिकार खत्म, सिर्फ़ इसलिए कि एक परिवार का राजनीतिक वर्चस्व बना रहे।कांग्रेस ने न सिर्फ़ संविधान को बंधक बनाया, बल्कि 42वें संविधान संशोधन के जरिए लोकतंत्र को अपने अधीन करने की कोशिश की ताकि देश की सत्ता लोकतंत्र नहीं, वंशवाद से चले।लेकिन देश की जनता ने तानाशाही का जवाब लोकतंत्र से दिया।1977 के चुनाव में जनता ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया। खुद इंदिरा गांधी और संजय गांधी रायबरेली और अमेठी से हार गए। पूरे भारत की जनता ने एक आवाज में कहा — लोकतंत्र में परिवार नहीं, जनता का शासन चलेगा।आज उसी कांग्रेस को “लोकतंत्र” की बात करते देखना वैसा ही है जैसे अपराधी को क़ानून पर भाषण देते देखना।कांग्रेस का इतिहास “संविधान बचाने” का नहीं, गांधी परिवार को सत्ता में बनाए रखने के लिए हर लोकतांत्रिक मर्यादा को तोड़ने का रहा है।आज़ादी के बाद 77 सालों में बहुत कुछ बदल गया लेकिन कुछ नहीं बदला तो वो है कांग्रेस में परिवारवाद।जब एक पार्टी के लिए परिवार प्रेम देश प्रेम से बड़ा हो तो उस पार्टी का पतन देर-सवेर निश्चित है, आज कांग्रेस उसी का परिणाम भुगत रही है।क्योंकि कोई जनता के अधिकारों और आवाज़ को दबाने का कितना भी प्रयास कर ले, लोकतंत्र में आख़िर में जीत जनता की होती है।”

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