रांची : राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के मुख्य अतिथि के रूप में खूंटी में आयोजित महिला स्वयं सहायता समूह सम्मेलन में राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन जी एवं जनजातीय कार्य मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा तथा अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ सीएम हेमंत सोरेन शामिल हुए।इस अवसर पर राष्ट्रपति को झारखण्ड की माताओं-बहनों द्वारा बनाया गया पलाश ब्राण्ड उत्पाद भी भेंट किया।राष्ट्रपति मुर्मु की मुख्य उपस्थिति में खूँटी में महिला स्वयं सहायता समूह सम्मेलन कार्यक्रम में सीएम ने कहा आज जनजातीय कार्य मंत्रालय के सभी माननीय मंत्रीगण और अधिकारी यहां उपस्थित हैं। आदिवासी समाज के संदर्भ में हमारे इतने बड़े केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रालय तथा विभाग कार्य करते हैं। आदिवासियों के लिए, उनको पैरों पर खड़ा होने के लिए, उनके आय के स्रोत बढ़ाने के लिए चिंतन-मंथन और कार्य जो हम करते हैं उसका प्रभाव बहुत अच्छा दिखता है यह हम कह नहीं सकते हैं। आज भी हमारे आदिवासी समुदाय के लोग कई चुनौतियों के साथ संघर्ष कर रहे हैं। जल, जंगल और जमीन हमारी पहचान है। वहीं झारखण्ड राज्य को कोयला, लोहा, तांबा, अभ्रक और यूरेनियम के लिए भी जाना जाता है। यहां के खनिज संपदाओं से पूरा देश रोशन होता है। मगर हमारे आदिवासी समाज के लोग जो विस्थापन का दंश झेल रहे हैं, वनों में रहते हैं, उन्हें आज भी दो वक्त की रोटी जुटाने में जद्दोजहद करनी पड़ती है।आज देश के सर्वोच्च पद पर आसीन माननीय राष्ट्रपति महोदया यहां हैं। माननीय राष्ट्रपति जी भी आदिवासी समुदाय से आती हैं। इस राज्य के आदिवासी समुदाय के लिए जीवन मरण की मांग है। अगर इनकी मांग को केन्द्र से स्वीकृति दिलायी जाए तो निश्चित रूप से राज्य के आदिवासियों का वजूद बचेगा। राज्य सरकार ने सरना आदिवासी धर्म कोड का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। साथ ही हो, मुंडारी, कुड़ुख भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल कराने का प्रयास होगा तो यहां के आदिवासियों का वजूद बच सकेगा।आदिवासियों के मान-सम्मान के लिए राज्य सरकार, केंद्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेगी। हासा और भाषा, जो हमारे पहचान का प्रतीक है इन्हें भी आगे ले जाने का काम करना होगा।राज्य में लैम्प्स, पैक्स की स्थिति के बारे में आप सभी जानते हैं। आज तक कभी भी वनोत्पाद को बाजार उपलब्ध कराने का सार्थक प्रयास नहीं हुआ। हम जब कभी मेले, समारोह में जाते हैं तो वनोत्पाद से जुड़े स्टाल्स देखने को मिलते हैं। मगर वास्तविकता जमीनी स्तर पर बिल्कुल इससे अलग है। असल में इसका लाभ हम कितने लोगों को पहुंचा पा रहे हैं यह देखने की मेरी कोशिश रहती है। इसी ओर हम कार्य भी कर रहे हैं।जब से आदरणीय बड़े भाई अर्जुन मुंडा जी ने जनजातीय मंत्रालय में कार्यभार संभाला है तब से जरूर यहां ट्राईफेड के अंदर सक्रियता दिखी है। मैं आशा करता हूँ झारखण्ड को इसका लाभ मिलता रहेगा।
आज इसी कड़ी में झारखण्ड सरकार ने सिदो कान्हू कृषि वनोत्पाद महासंघ का गठन किया है। बड़ी तेजी से महासंघ को सक्रिय करने में सरकार लगी हैं। लगभग सभी जिलों में यूनियन को गति देने के लिए राशि भी उपलब्ध करा दी गई है। राज्य में लगभग 2 लाख 25 हजार सेल्फ हेल्प ग्रुप कार्य कर रही है। आज पलाश ब्राण्ड की मांग भी बाजार में तीव्र गति से बढ़ी है। राज्य में 14 हजार से अधिक गांव सीधे वनोपज से जुड़े हुए हैं। मगर लघु वन उत्पाद का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बाजार मूल्य से बहुत कम है। उदाहरण के लिए लाह का एमएसपी लगभग 280 रुपये प्रति किलो है जबकि बाजार मूल्य 1100-1200 रुपये प्रति किलो। हमें MSP बढ़ाना चाहिए। राज्य सरकार वन उत्पादों के लिए नए समर्थन मूल्य लाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।



