CM Hemant Soren: कई बेगुनाह जेल में रहते हैं,कई गरीब लोगों को नहीं पता होता है कि सरकार अपने खर्च पर उनको वकील मुहैया करा सकती है

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झारखंड मंत्रालय में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में झारखंड अभियोजन सेवा के लिए चयनित सहायक लोक अभियोजकों (एपीपी) को मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने नियुक्ति पत्र सौंपा।सीएम ने कहा झारखण्ड अभियोजन सेवा के लिए चयनित आप सभी 107 सहायक लोक अभियोजकों की नियुक्ति हो रही है। इस शुभ अवसर पर आप सभी नवनियुक्त अभियोजकों को अनेक-अनेक शुभकामनाएं और जोहार। इस सभागार से हमने पहले भी कई युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। राज्य में पेंडिंग केस की बहुतायत को देखते हुए मुझे बताया गया है आपकी ट्रेनिंग का समय कम करके आपको सीधे योगदान हेतु भेजा जा रहा है। मगर आने वाले समय में जरूरी बेहतर ट्रेनिंग के लिए हम राज्य के साथ-साथ राज्य के बाहर भी आपको भेजने का काम करेंगे।अभी हाल के दिनों में माननीय सप्रीम कोर्ट के जज और अन्य गणमान्य अतिथियों के बीच माननीय राष्ट्रपति महोदया ने कहा था हम देश में जेल को कम बनाने पर काम क्यूँ नहीं कर सकते हैं।स्पष्ट है वर्तमान समय में हमारे न्यायपालिका में कई सारे केस पेंडिंग होने के चलते कैदियों की संख्या बढ़ी रहती है। यह संकेत देश और राज्य के लिए ठीक नहीं है। यह बात छोटी जरूर लगती है मगर इसके मायने बहुत बड़े हैं।आप न्यायिक क्षेत्र से आते हैं इसलिए आप समझ सकते हैं जो बेगुनाह जेल में रहते हैं, बिना घटना के सजा भुगत रहे हैं उनकी क्या मनोदशा रहती होगी। डॉक्टर और वकील को आमतौर पर लोग भगवान की तरह मानते हैं।झारखण्ड में अधिक संख्या में आदिवासी, दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग निवास करते हैं। अगर आप देखें तो आमजनों को कानून के बारे में जानकारी नहीं होती है। ऐसी स्थिति में उन्हें न्याय दिलाना, कितना कठिन या आसान हो सकता है यह आप निश्चित रूप से अनुभव करेंगे। मुझे आशा है न्यायपालिका में अपने योगदान से आप मील का पत्थर साबित करेंगे।मुझे जो जानकारी है, राज्य के कारागार में ऐसे कई गरीब बंद है जो पैसे के अभाव में अपने लिए न वकील कर पाते हैं, न कोर्ट-कचहरी जाने में समर्थ होते हैं। आज भी कई गरीब लोगों को नहीं पता होता है कि सरकार अपने खर्च पर उनको वकील मुहैया करा सकती है, साथ ही अन्य सहायता भी उपलब्ध कराती है। इन सभी बातों को भी लोगों को बताने की आवश्यकता है।झारखण्ड का सामाजिक तानाबाना, भौगौलिक संरचना, अन्य राज्यों से अलग हैं। यहाँ अलग-अलग भाषा, बोलचाल के लोग रहते है। बहुत ऐसे लोग हैं जिन्हें हिंदी भी नहीं आती है। इसलिए आप स्थानीय भाषा की ट्रेनिंग लें जिससे काम करने में आपको आसानी एवं लोगों को न्याय दिलाने में आपको सहूलियत हो सके।आमतौर पर न्यायपालिका में अंग्रेज़ी का प्रचलन अधिक है। लेकिन झारखण्ड में जो हिंदी भी न जानता हो उसके लिए यह और भी कठिन होता होगा। आप संबंधित स्थानीय भाषाओं की ट्रेनिंग अवश्य लें।सहायक लोक अभियोजकों की नियुक्ति पूरी नहीं हुई है। अभी और भी सहायक लोक अभियोजक (एपीपी) नियुक्त होने हैं। इस तरफ सरकार कदम बढ़ा रही है। राज्य में पेंडिंग मामलों का निष्पादन करने में आप सभी अपनी भूमिका निभाएं। नए डगर के सफर में आप सभी को पुनः हार्दिक बधाई, शुभकामनाएं और जोहार।

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