“आदिवासी “हो” भाषा (वारंग क्षिति लिपि) को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की पहल के लिए चम्पई सोरेन ने असम सीएम और गृह मंत्री का आभार जताया

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Champai Soren

रांची : झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम में रहने वाले आदिवासी “हो” समाज के परिवारजनों की कई वर्षों से माँग थी कि “हो” भाषा (वारंग क्षिति लिपि) को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। इस संदर्भ में, कल असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने आदिवासी “हो” समाज युवा महासभा और अखिल भारतीय हो भाषा एक्शन कमेटी के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। गृह मंत्री ने इस प्रतिनिधिमंडल की बात सुनी और आश्वासन दिया कि भारत सरकार उनकी इस माँग पर विचार करेगी। साथ ही यह भी कहा कि मोदी सरकार देश के हर समाज की संस्कृति को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

झामुमो छोड़ भाजपा में शामिल हुए झारखण्ड के आदिवासी नेता चंपई सोरेन ने असम सीएम और गृह मंत्री का आभार जताया “आदिवासी “हो” भाषा (वारंग क्षिति लिपि) को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की इस पहल के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री Himanta Biswa Sarma जी को धन्यवाद।आदिवासी समाज की दशकों पुरानी मांग को सुनने तथा इस पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन देने के लिए माननीय गृहमंत्री श्री Amit Shah जी को धन्यवाद।इस समाचार से आदिवासी “हो” समाज में खुशी की लहर है। मुझे विश्वास है कि समाज के लाखों लोगों का यह सपना शीघ्र साकार होगा।”

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