रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को झारखण्ड सरकार द्वारा झारखंडी युवाओं के हित के लिए बनाई गई नियोजन नीति को रद्द कर दिया।मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने रमेश हांसदा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2021 में पारित नियोजन नीति (JSSC रूल्स संशोधन) को रद्द कर दिया। अब वैसे अभ्यर्थी भी JSSC और JPSC द्वारा ली जाने वाली नियुक्ति प्रतियोगिता में शामिल हो सकते हैं. जिन्होंने झारखंड के बाहर दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई की है।झारखंड के युवाओं के हक और अधिकार पर ग्रहण लगाने वाले याचिका दायर करने वाले रमेश हांसदा और कोई नहीं बल्कि भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य हैं। अब सवाल ये उठता है कि क्या भाजपा ये नहीं चाहती कि झारखंडी युवा आगे बढ़े।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम सांसद दीपक प्रकाश ने हेमंत सरकार की नियोजन नीति 2021के निर्णय के विरोध में उच्च न्यायालय के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा इसी प्रकार भाषा के आधार पर भी राज्य सरकार ने अनुचित निर्णय लिए। घर घर बोली जाने वाली हिंदी और अंग्रेजी को हटाकर इस सरकार ने चंद लोगों द्वारा व्यवहार में लाए जाने वाले संथाली, नागपुरी, मुंडारी , ऊर्दू भाषा को प्राथमिकता दी जो तुष्टिकरण की पराकाष्ठा थी।बड़ा सवाल यह है की क्या संथाली, नागपुरी, मुंडारी दीपक प्रकाश के लिए तुष्टिकरण है , क्या यहां की भाषा जो यहां की पहचान है उसे आगे करना तुष्टिकरण की नीति है ?



