रांची : मंत्री इरफ़ान अंसारी ने आज एक्स पर पोस्ट किया कि “बाबूलाल मरांडी जी, @yourBabulal आपके जैसा सांप्रदायिकता फैलाने वाला व्यक्ति पूरे झारखंड में नहीं है। समाज में सांप्रदायिकता का ज़हर घोलकर, लोगों में नफरत फैलाने और भाईचारे को तोड़ने का जो काम आप कर रहे हैं, उसमें तो आप Expert हैं। कम से कम युवा पीढ़ी को तो बख्श दीजिए।रिम्स का निर्णय लॉ एंड ऑर्डर को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। क्या आपको वह नजर नहीं आता जब हमारे डॉक्टरों पर हिंसक झड़प में हमला हुआ था? लेकिन आप तो हर मामले को गलत एंगल देकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगे रहते हैं। यह सरासर गलत है।और हां, सरस्वती पूजा अवश्य मनाई जाएगी, और वह भी डॉक्टरों द्वारा हॉस्टल में। आपको अगर फुर्सत है, तो बेहतर होगा कि समाज को बांटने के बजाय उसकी भलाई के बारे में सोचें। कहते हैं न, खाली दिमाग शैतान का घर होता है।
इससे पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर लिखा था कि”यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि @IrfanAnsariMLA जैसे लोगों को रिम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी सांप्रदायिक विचारधारा और फैसले सांस्कृतिक और धार्मिक विभाजन को बढ़ावा दे रहे हैं। ताजा मामला सरस्वती पूजा को लेकर उठाए गए सवालों का है।सरस्वती पूजा कोई साधारण धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, यह हमारी शिक्षा, ज्ञान और संस्कृति की आत्मा है। यह वह परंपरा है जो पीढ़ियों से हमारे समाज को एक सूत्र में पिरोती आई है। लेकिन आज इसे रोकने की कोशिशें हो रही हैं। सवाल यह है कि अगर आज सरस्वती पूजा पर आपत्ति की जा रही है, तो क्या कल हमारी संस्कृति और देवी-देवताओं के अस्तित्व पर भी सवाल उठाए जाएंगे?मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी से अनुरोध है कि वे इस बेहद संवेदनशील मामले का खुद से संज्ञान लें।
इसके बाद मरांडी ने रिम्स में सरस्वती पूजा पर रोक हटाने पर भी प्रतिक्रिया दी ”जानकारी मिली है कि रिम्स प्रशासन ने रिम्स के डाक्टरों, छात्रों एवं वहाँ के जनभावना का सम्मान करते हुए सरस्वती पूजा का आयोजन नहीं करने देने का अपना तुगलकी आदेश अब वापस ले लिया है।अब वहाँ पहले से चली आ रही परम्परा का निर्वहन करते हुए विधिवत सरस्वती पूजा का आयोजन होगा।शासन का यह कदम स्वागत योग्य है।”




