JSSC द्वारा चयनित 444 प्रशिक्षण अधिकारियों को सीएम ने वितरित किया नियुक्ति पत्र

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रांची : मुख्यमंत्री Hemant Soren हरिवंश टाना भगत इन्डोर स्टेडियम, खेलगांव, राँची में आयोजित मरड. गोमके जयपाल सिंह मुण्डा पारदेशीय छात्रवृति वितरण, शिलान्यास कार्यक्रम तथा नियुक्ति पत्र एवं परिसंपत्ति वितरण समारोह में शामिल हुए।सरना स्थल घेराबंदी के लिए ₹222 करोड़, धुमकुड़िया भवन निर्माण हेतु ₹225 करोड़, कब्रिस्तान घेराबंदी हेतु ₹96 करोड़, रांची के करमटोली में 520 बच्चों के लिए 7 मंजिला छात्रावास एवं महिला महाविद्यालय रांची में 500 बेड का हॉस्टल निर्माण हेतु शिलान्यास किया गया। मरड. गोमके जयपाल सिंह मुण्डा पारदेशीय छात्रवृति योजना के तहत शत प्रतिशत स्कॉलरशिप पर उच्च शिक्षा हेतु 22 युवाओं को स्वीकृति पत्र सौंपा गया।आज मुख्यमंत्री Hemant Soren द्वारा अबुआ बीर अबुआ दिशोम अभियान के तहत 3,700 एकड़ का सामुदायिक वन पट्टा वितरित किया गया। इसके अलावा शनिवार 27 सितंबर को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के द्वारा चयनित 444 प्रशिक्षण अधिकारियों को आज नियुक्ति पत्र वितरित किया गया।

सीएम हेमंत सोरेन ने कहा हमारी सरकार हर नियुक्ति को लेकर अतयंत गंभीर है, और हर हाल में झारखंडी युवाओं को लेकर किए गए अपने हर वादे को हम अवश्य निभायेंगे। आगामी वर्षों में हम और तेजी एवं पारदर्शिता के साथ हर एक नियुक्ति प्रक्रिया संपन्न कराने को लेकर प्रतिबद्ध हैं।इसी कड़ी में आज 444 प्रशिक्षण अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किया गया।आईटीआई में कैंपस सलेक्शन का अवसर भी प्रदान किया जाता है, उसके तहत इस वर्ष लगभग 3000 छात्र-छात्राओं को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार सरकार के द्वारा उपलब्ध कराया गया। ये अपने हुनर का बेहतर प्रदर्शन करते हुए लगातार आगे की ओर बढ़ रहें हैं.कल ही इस सभागार में 500 से अधिक युवाओं को हम लोगों ने नियुक्ति पत्र दिया। कोई शिक्षक बने, कोई इंजीनियर बने, कोई टेक्नीशियन बने। आज फिर से इस सभागार में 400 से अधिक नौजवानों को अपनी जिंदगी के नए सफर में जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है.अब आप वृहत क्षेत्र में जाएंगे और आपको और अधिक निखरने का अवसर प्राप्त होगा। आईटीआई के क्षेत्र से निकलने के बाद यह आपका पहला पड़ाव है। टाटा ग्रुप, जिंदल ग्रुप, एनटीपीसी, सीसीएल समेत सरकारी क्षेत्र में जाने का मौका मिलेगा.विदेश में उच्च शिक्षा के लिए युवाओं की संख्या बढ़ाने की बात कही गई है। निश्चित रूप से अगर हम 25 बच्चों को विदेश में शिक्षा के लिए भेज सकते हैं तो 100 बच्चों को क्यों नहीं भेज सकते? इसमें नीति निर्धारण की आवश्यकता है। मैं इस पर गंभीरता से विचार करूंगा

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