भाजपा की जीत पर विपक्ष ही नहीं सुप्रीम कोर्ट भी कर चूका है टिप्पणी”लोकतंत्र की ह*त्‍या”

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हाल ही में कांग्रेस उम्मीदवार के नामांकन रद्द होने के बाद विपक्ष को तगड़ा झटका देते हुए सूरत लोकसभा सीट पर भाजपा ने निर्विरोध जीत हासिल कर ली.जिसे विपक्ष ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया। वहीं 29 अप्रैल को कांग्रेस को एक बार फिर बड़े झटके का सामना करना पड़ा. इंदौर लोकसभा सीट से प्रत्याशी अक्षय कांति बम नामांकन वापस ले लेकर भाजपा में शामिल हो गए. कांति बम के नामांकन वापस लेने के बाद इस सीट पर भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती ख़त्म हो गई. ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि चुनाव में भाजपा की जीत में जनता के वोट के बजाय विपक्ष के साथ कुछ गड़बड़ी का हाथ होता है.इससे पहले भी देखें तो,अरुणाचल में 10 विधायकों ने निर्विरोध जीत हासिल कर ली .मध्य प्रदेश की खजुराहो लोकसभा सीट से सपा उम्मीदवार का नामांकन रद्द कर दिया गया। जिसके बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे लोकतंत्र की ह*त्‍या करार दिया। एक और मामले पर गौर करें तो, चंडीगढ़ मेयर चुनाव में बीजेपी आप को हराकर शानदार जीत हासिल की थी .लेकिन मामला फिर कोर्ट पहुंचा और सच का खुलासा हुआ.सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव में ”आप” के प्रत्याशी कुलदीप कुमार को विजेता घोषित कर दिया. 53 साल के अनिल मसीह पर चंडीगढ़ मेयर चुनाव में बैलेट पेपर से धोखाधड़ी मामले में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने 5 फरवरी को सुनवाई के दौरान अनिल मसीह पर तीखी टिप्पणी की थी. सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव के दौरान जो हुआ, उसे लोकतंत्र की ‘ह*त्या’ और ‘मजाक’ बताया था. विपक्ष हमेशा भाजपा पर आरोप लगाता रहा है कि भाजपा का एक ही एजेंडा है, लोकतंत्र और संविधान को खत्म करना है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या विपक्ष का भाजपा पर आरोप सही है ? भाजपा का बार-बार निर्विरोध हो जाना सोची समझी साजिश है ? या बस एक इत्तेफाक.

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