मंगलवार को मुख्यमंत्री चम्पई सोरेन की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की अहम बैठक में कुल 30 प्रस्ताव पर मुहर लगी। बैठक के बाद सीएम ने मीडिया से बात की उन्होंने बताया कि सरना धर्म कोड, 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति जैसे कई मुद्दों को लेकर राष्ट्रपति से मुलाकात करने के लिए समय मांगा गया था, लेकिन बहुत ही दुःख होता है कि स्थानीय मुद्दों को लेकर राष्ट्रपति भवन से समय नहीं मिला।इसके अलावा राष्ट्रपति से अनुमति को लेकर चंपाई सोरेन ने एक्स पर भी एक पोस्ट किया जिसमें उन्होंने कहा यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि झारखंड की माटी से जुड़े मुद्दों जैसे 1932 के खतियान पर आधारित स्थानीयता नीति, सरना धर्म कोड, 27% ओबीसी आरक्षण आदि को लेकर महामहिम राष्ट्रपति जी से मिलने की अनुमति नहीं मिल पाई। एक ओर राजभवन लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार द्वारा पास किये गए विधेयकों को रोक देता है, और दूसरी ओर… कम से कम जनहित के मुद्दों पर ऐसा नहीं होना चाहिए था।लेकिन झारखंड को एटीएम समझने वालों भाजपा नेताओं ने ना कभी यहां के आदिवासियों, मूलवासियों एवं आम लोगों को अपना समझा है, ना ही यहां के मुद्दों के प्रति उनमें थोड़ी सी भी गंभीरता है।



