उत्तराखंड में सुरंग में फंसे मजदूर पर CM: केंद्र को कोई फिक्र नहीं, मजदूर विरोधी हैं यह लोग

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लोहरदगा जिला स्थित चीरी खेल मैदान, कुड़ू में आयोजित आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वार कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन सम्मिलित हुए ।इस अवसर पर ₹133 करोड़ की 21 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास एवं 80, 208 लाभुकों के बीच ₹132 करोड़ की परिसंपत्ति का वितरण हुआ।सभी चरणों मे जिलों में जाकर मैं खुद इस अभियान की समीक्षा कर रहा हूँ कि लोगों को लाभ मिल रहा है कि नहीं। आप देखेंगे लाखों लोगों को राज्य सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का काम किया है, जो निरंतर जारी है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा झारखण्डवासियों को रोटी, कपड़ा और मकान के अधिकार को सुनिश्चित करने की ओर हम बढ़े हैं। पूर्व की सरकार ने 11 लाख राशन कार्ड निरस्त करने का काम किया, जबकि हमने 20 लाख नए जरूरतमंद लोगों को हरा राशन कार्ड से जोड़ा। सोना सोबरन धोती साड़ी योजना के तहत 65 लाख कार्डधारियों को साल में 2 बार धोती-लुंगी-साड़ी दिया जा रहा है।हम केंद्र सरकार के पास गए कि राज्य के लाखों जरूरतमंद लोगों को आवास अभी नहीं मिला है। अनेक बार आग्रह किया पर केंद्र सरकार ने नहीं सुना। हमने राज्य के लाखों परिवारों को अबुआ आवास योजना के अंतर्गत आवास देने की प्रक्रिया शुरू की है। मुझे पता चला है कि सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में सबसे ज्यादा आवेदन अबुआ आवास को ही लेकर आ रहे हैं। आवेदन लेने के लिए जरूरत पड़े तो जिला प्रशासन और काउंटर बढ़ाये। सम्मानजनक जीवन जीने के लिए अबुआ आवास योजना के अंतर्गत हम 3 कमरों का मकान देंगे जो पीएम आवास से भी बड़ा होगा। इसमें मिलने वाली सहायता राशि भी अधिक होगी।हम लाखों लोगों को हक़-अधिकार से जोड़ रहे हैं। मगर विपक्ष को यह सब नहीं दिखता। लगता है विपक्ष के लोग शीशे की जगह टीन का चश्मा पहनते हैं इसलिए इन्हें यह सब नहीं दिखता।आज 17 दिनों से उत्तराखंड में निर्माणाधीन सुरंग में मजदूर फंसे हुए हैं। इसमें झारखण्ड से भी मजदूर हैं। हमारे पदाधिकारी तब से वहीं हैं। वहां मजदूर फंसे हैं इसलिए केंद्र को कोई फिक्र नहीं है। अगर किसी व्यापारी या राजनेता का परिजन फंसा होता तो ऐसी स्थिति नहीं हुई होती। मजदूर विरोधी हैं यह लोग।आपके गांव, पंचायत में हमने पदाधिकारियों को योजनाओं की गठरी बांधकर भेजने का काम किया है। इससे पहले पूर्व की सरकारों ने कभी लोगों की सुधि लेने का काम नहीं किया। यही कारण है कि लाखों आवेदन हमें आये।पूर्व की सरकार कभी पदाधिकारियों को गांव, पंचायत में भेजने का काम नहीं करती थी। यह सिर्फ अपनी सेवा करवाते थे। हमने यह सब बदला, आज लाखों जरूरतमंद लोगों को पेंशन का अधिकार मिल रहा है, विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है। आज पदाधिकारी आमजन की सेवा कर रहे हैं।

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