प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई,जमीन घोटाले से जुड़े मामले में आईएएस छवि रंजन गिरफ्तार

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झारखंड में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। जमीन घोटाला मामले में आईएएस छवि रंजन को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों ने दस घंटे तक पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया। उन पर रांची में अवैध रूप से जमीन हड़पने और बेचने का आरोप है। उन पर इससे जुड़े भूमि घोटाले के मामले में कार्रवाई की गई है। वर्तमान में रंजन झारखंड के समाज कल्याण विभाग में निदेशक पद पर हैं। ये घोटाले उनके रांची के डिप्टी कमिश्नर के कार्यकाल के दौरान किए गए थे।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पूछताछ के दौरान ईडी के द्वारा छवि रंजन से हेहल अंचल के बजरा मौजा के 7.16 एकड़ जमीन की घेराबंदी एवं उसके दस्तावेज रजिस्ट्री कार्यालय से गायब पाये जाने के मामले को लेकर पूछताछ की गई।इसके अलावा छवि रंजन से सेना के कब्जेवाली जमीन तथा चेशायर होम रोड की जमीन की खरीद बिक्री मामले में भी उनकी भूमिका के बारे में पूछताछ की गई। अंततः अधिकतर सवालों के जवाब से असंतुष्ट ईडी ने छवि रंजन को गिरफ्तार कर लिया।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कथित अवैध भूमि बिक्री से संबद्ध धन शोधन की जांच कर रही है। इसी सिलसिले में झारखंड के आईएएस अधिकारी छवि रंजन को पूछताछ के लिए तलब किया गया था। उन्होंने इसके लिए दो सप्ताह का समय भी मांग था, लेकिन मंजूरी नहीं मिलने के बाद उनसे पूछताछ की गई थी। इससे पहले भी एजेंसी ने उनसे संक्षिप्त पूछताछ की थी, जब इस मामले में झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में उनके तथा अन्य के परिसरों में छापेमारी की गई थी।

13 अप्रैल को हुई थी छापेमारी
मालूम हो कि गत 13 अप्रैल को आईएएस छवि रंजन के रांची स्थित दो व जमशेदपुर स्थित एक ठिकाने सहित कुल 22 ठिकानों पर ईडी ने छापा मारा था। इस दौरान ईडी को बड़गाईं अंचल कार्यालय के राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के आवास से सरकारी फाइलें व सैकड़ों जमीन के डीड मिले थे। एजेंसी ने छापेमारी के बाद झारखंड सरकार के एक अधिकारी समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया था।

क्या है मामला?
धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई। एजेंसी रक्षा जमीन से संबंधित एक भूखंड समेत 12 से अधिक जमीन सौदों के मामले में जांच कर रही है, जिसमें जमीन माफिया, बिचौलिए और नौकरशाह सहित एक समूह साठगांठ कर कथित तौर पर 1932 की शुरुआत से ही जमीन के कामों और दस्तावेजों की धोखाधड़ी में शामिल है। पीएमएलए के तहत अपनी जांच शुरू करने के लिए संघीय जांच एजेंसी ने संबंधित नागरिक अधिकारियों द्वारा दर्ज कुछ जाली व्यक्तिगत पहचान दस्तावेजों के बारे में पुलिस प्राथमिकी का संज्ञान लिया।

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