हेमंत सरकार ने डॉक्टरों की जिंदगी और उनकी संपत्ति की सुरक्षा कानून लागू की

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हाल के दिनों में कई जिलों में चिकित्सक कर्मियों पर हमले (इसमें डॉक्टर विशेष रूप से शामिल हैं) और चिकित्सा संस्थानों को नुकसान पहुंचाने की घटना काफी बढ़ी है. इसे देखते हुए सरकार अब अपराधियों पर कानूनी शिकंजा कसेगी. सरकार चलते बजट सत्र 2023 में ‘झारखंड चिकित्सा सेवा से संबंद्ध व्यक्तियों, चिकित्सा सेवा संस्थान (हिंसा एवं संपत्ति नुकसान निवारण) विधेयक 2023’ को विधानसभा से पारित कराएगी. विधेयक पारित और राज्यपाल से स्वीकृति मिलने के बाद जब कानून धरातल पर उतरेगा तो अपराधी को 2 साल की सजा और 50,000 रुपए का आर्थिक जुर्माना लग सकेगा. प्राइवेट चिकित्सा संस्थानो में होने वाले हिंसा पर रोक लगाने के लिए सरकार विधेयक में कई महत्वपूर्ण पहल की है.
झारखंड सरकार ने राज्य के चिकित्सकों एवं चिकित्सा सेवा से संबद्ध व्यक्तियों और संस्थानों की सुरक्षा के लिए ‘चिकित्सा सेवा संस्थान (हिंसा एवं सम्पत्ति नुकसान निवारण) विधेयक 2023’ को स्वीकृति दे दी. झारखंड सरकार के मंत्रिमंडल सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में 39 अन्य प्रस्तावों के साथ इस महत्वपूर्ण विधेयक को स्वीकृति दी गई.
राज्य में विभिन्न स्थानों पर चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों के साथ लगातार हो रही हिंसा की घटनाओं के मद्देनजर चिकित्सा क्षेत्र की मांग को देखते हुए राज्य मंत्रिमंडल ने इस विधेयक को अपनी मंजूरी दी. झारखंड सरकार के मंत्रिमंडल सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में 39 अन्य प्रस्तावों के साथ इस महत्वपूर्ण विधेयक को स्वीकृति दी गयी. राज्य में विभिन्न स्थानों पर चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों के साथ लगातार हो रही हिंसा की घटनाओं के मद्देनजर चिकित्सा क्षेत्र की मांग को देखते हुए राज्य मंत्रिमंडल ने इस विधेयक को अपनी मंजूरी दी. इस कानून में दंडात्मक कार्रवाई के रूप में अधिकतम दो साल तक कारावास तक होगा. इसके अलावा जुर्माना भी 50 हजार रुपये तक होगा. इस मामले में जिले उपायुक्त एसडीओ स्तर से इसकी जांच करायेंगे.
गौरतलब है कि इस कानून के लिए एक मार्च को पूरे राज्य के चिकित्साकर्मी हड़ताल पर थे. अब राज्य विधानसभा से इसे पारित करा कर राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा जायेगा जिससे इसे कानून का रूप दिया जा सके. मंत्रिमंडल द्वारा इस विधेयक को पारित करने पर भारतीय चिकित्सा संघ ने प्रसन्नता व्यक्त की है. इस मामले में जिले उपायुक्त एसडीओ स्तर से इसकी जांच करायेंगे.

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