मोरहाबादी मैदान में आदिवासी एकता महाजुटान, शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा—‘झारखंड के हक पर डाका नहीं चलेगा’

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Shilpi Neha Tirkey

रांची। राजधानी रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में आयोजित आदिवासी एकता महाजुटान रैली में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। रैली को संबोधित करते हुए मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन, हक-हुकूक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि महाजुटान में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि झारखंड के आदिवासी अपने अधिकारों की लड़ाई को भूले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह महज एक रैली नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता, अधिकार और अस्तित्व की आवाज है।उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि आदिवासी विधानसभा सीटों को कम करने की किसी भी कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की राजनीतिक भागीदारी और संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मंत्री ने MMDR कानून का भी विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके जरिए झारखंड के आदिवासी-मूलवासी समुदाय के अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जे की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड की खान-खदान, जल-जंगल-जमीन और प्राकृतिक संपदा पर पहला अधिकार झारखंडियों का है।रैली के दौरान उन्होंने कहा कि मोरहाबादी मैदान से स्पष्ट संदेश गया है कि झारखंड के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।सभा में ‘झारखंड के हक पर डाका नहीं चलेगा’, ‘परिसीमन की साजिश नहीं चलेगी’, ‘MMDR के जरिए अधिकारों की लूट नहीं चलेगी’ और ‘खान-खदान हमारा है, अधिकार हमारा है’ जैसे नारे लगाए गए।महाजुटान के दौरान आदिवासी एकता, झारखंड की अस्मिता और जल-जंगल-जमीन के मुद्दे प्रमुख रूप से छाए रहे।

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