रांची। झारखंड में सरकारी संस्थानों में पत्रकारों की एंट्री को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। भाजपा नेताओं ने हेमंत सोरेन सरकार पर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा है।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि पहले RIMS, फिर प्रोजेक्ट भवन और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के बाद अब सदर अस्पताल में भी पत्रकारों की पहुंच प्रतिबंधित किए जाने की खबर सामने आई है। उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह प्रतिबंध बढ़ते रहे तो आने वाले समय में थाना और अन्य सरकारी कार्यालयों में भी पत्रकारों की एंट्री रोक दी जा सकती है।मरांडी ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि पत्रकार सरकार के मेहमान नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रहरी हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की एंट्री रोकने से सवाल खत्म नहीं होंगे और कैमरे बंद करने से सच को छिपाया नहीं जा सकता।
वहीं, भाजपा नेता अमर कुमार बाउरी ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सचिवालय, RIMS परिसर और सदर अस्पताल जैसे स्थानों पर पत्रकारों के लिए दरवाजे बंद किए जा रहे हैं। बाउरी ने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के साथ अन्याय बताते हुए सवाल उठाया कि यदि पत्रकार सवाल नहीं पूछेंगे तो सरकार को जवाब भी नहीं देना पड़ेगा।
भाजपा नेताओं के इन आरोपों से झारखंड में पत्रकारों की सरकारी संस्थानों तक पहुंच और प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा के बाबूलाल मरांडी और अमर कुमार बाउरी के आरोपों पर अब झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने पलटवार किया है।JMM ने भाजपा पर मीडिया को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा ने मीडिया को ‘गोदी मीडिया’ बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पार्टी ने अपने बयान में भारत की प्रेस फ्रीडम रैंकिंग का हवाला देते हुए केंद्र की भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा।JMM ने कहा कि भारत 180 देशों की प्रेस फ्रीडम रैंकिंग में 157वें स्थान पर है और भाजपा नेताओं को पहले इस स्थिति पर जवाब देना चाहिए। पार्टी ने भाजपा शासित राज्यों में पत्रकारों के साथ पर सवाल उठाया है।JMM ने कहा है कि बाबूलाल मरांडी जी भाजपा को यह जरूर बताएंगे कि जैसा वह मध्य प्रदेश या अन्य भाजपा शासित राज्यों में पत्रकार बंधुओं के साथ व्यवहार कर लोकतंत्र का उत्सव मनाती है, भाजपा वो करने से बाज आए।


