रांची। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने कहा कि भारत सरकार द्वारा लाया गया खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन बिल, 2026 राज्य और राष्ट्र हित में है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस इसकी गलत व्याख्या कर राज्य की जनता के बीच भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। भाजपा इसकी कड़ी निंदा करती है।
रघुबर दास ने बुधवार को झारखंड भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि राज्य सरकार एक ओर राजस्व में कमी का रोना रो रही है, जबकि दूसरी ओर केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बावजूद खदानों को चालू नहीं किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में 34 कोल ब्लॉक में से केवल चार ही चालू हो पाए हैं। अन्य खनिज खदानों की स्थिति भी इससे अलग नहीं है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यह तथ्य छिपा रही है कि माइनिंग सेक्टर से मिलने वाले कुल टैक्स और वैधानिक भुगतान का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा सीधे राज्यों को मिलता है और यह व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी।
रघुबर दास ने कहा कि वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने रॉयल्टी के अतिरिक्त खनन प्रभावित जिलों में जनजातीय समाज और स्थानीय लोगों के विकास के लिए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के माध्यम से अतिरिक्त राशि देने की व्यवस्था लागू की थी। उन्होंने कहा कि खदानें शुरू होने पर राज्य सरकार को रॉयल्टी, नीलामी राशि, प्रीमियम और DMFT से मिलने वाली राशि सहित 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हो सकता था।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की सरपरस्ती में चल रहे अवैध कारोबार के कारण वैध खनन को भारी नुकसान हुआ है। उनके मुताबिक, सरकारी आंकड़ों के आधार पर वित्तीय वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही में कोयले का उत्पादन 44.78 मिलियन टन था, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में घटकर 37.25 मिलियन टन रह गया।रघुबर दास ने कहा कि जब वैध खनन में कमी आएगी तो राज्य का वैध राजस्व भी स्वाभाविक रूप से घटेगा। उन्होंने राज्य सरकार से खनन क्षेत्र में तेजी लाने, लंबित खदानों को शुरू कराने और अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की।




