झारखण्ड : वीर भूमि भोगनाडीह में हूल दिवस के अवसर पर सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में 58 मजिस्ट्रेटों की तैनाती के साथ चप्पे-चप्पे पर पुलिस बलों को लगाया है।इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने राज्य सरकार पर वीर सिदो कान्हू की विरासत को मिटाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस भूमि ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया था, वहाँ सरकार लोगों को भयभीत कर, उन्हें कार्यक्रम से दूर रखने का प्रयास कर रही है।गौरतलब है कि पिछले सप्ताह राज्य सरकार ने वीर सिदो-कान्हू के वंशज मंडल मुर्मू को हूल दिवस कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके अलावा, हूल दिवस के मद्देनज़र मंडल मुर्मू सहित 52 अन्य लोगों को एसडीओ कोर्ट में बांड भरने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे मानने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि अपने ही गाँव में अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए उन्हें किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने कहा, हूल दिवस के दिन वीर भूमि भोगनाडीह को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है, 58 मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं और हर कदम पर पुलिस का पहरा है।सन 1855 में, जब वीर सिदो-कान्हू, चाँद-भैरव, फूलो-झानो के नेतृत्व में संथाल हूल हुआ था, तब उन वीरों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि आजादी के सात दशकों बाद भी, उनके वंशजों एवं उनके गाँव के लोगों को, उन्हें ही नमन करने के लिए भी एक तानाशाही सरकार से इजाजत लेनी पड़ेगी, बकायदा बॉन्ड भरना पड़ेगा।सत्ता के मद में चूर ये लोग भूल चुके हैं कि अब ना तो ब्रिटिश साम्राज्यवाद है, ना ही राजतंत्र। वीर सिदो-कान्हू की विरासत को मिटाने की कोशिश करने वालों को जनता मिट्टी में मिला देगी।




